बीरेंद्र कुमार झा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारत के बैंकों में बिना दावे वाले जमा पैसों का पता लगाने के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल शुरू करने का फैसला लिया है। देश के बैंकों में बड़ी संख्या में ऐसे खाते हैं जिनमें वर्षों से कोई लेन-देन नहीं बीबी हुआ है।फरवरी 2023 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने रिजर्व बैंक को करीब ₹35000 करोड़ की ऐसी जमा स्थानांतरित की है जिसमें पिछले 10 साल से कोई लेन-देन नहीं हुआ है।
सर्च करने के लिए एआई का होगा इस्तेमाल
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक समीक्षा बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए कहा कि जमाकर्ताओं और लाभार्थियों की पहुंच को व्यापक करने और उसमें सुधार के लिए एक देव पोर्टल बनाने का फैसला किया गया है।इसके जरिए इन बैंकों में जमा बिना दावेवाली राशि का पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सर्च के नतीजों को बेहतर करने के लिए कृत्रिम मेघा यानी एआई का इस्तेमाल किया जाएगा।
बिना दावे वाले पैसे सबसे अधिक एस बी आई में
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा की सबसे अधिक 808 6 करोड रुपए की बिना दावे वाली राशि भारतीय स्टेट बैंक में जमा है । इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक का नंबर आता है, जिसमें 5340 करोड रुपए बिना दावे वाली राशि मौजूद है ,वहीं तीसरे नंबर पर केनरा बैंक है ,जिसमें 4558 करोड़ रुपए की ऐसी राशि जमा है।बैंकों के पास जिस जमा राशि पर 10 साल तक कोई दावा नहीं किया जाता है, उसे रिजर्व बैंक के ‘ जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता’ (DEA) कोष में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
लाभार्थी तक पहुंचाया जाएगा पैसा
शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक इस उद्देश्य के साथ काम करता है कि कोई भी नई जमा बिना दावेवाली राशि में नहीं आए। इसके अलावा जो राशि बिना दावे के पड़ी है, उसे उसके सही लाभार्थी को निर्धारित प्रक्रिया के जरिए लौटाया जाए। इसके दूसरे पहलू पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बैंक बिना दावे वाले राशि की सूची अपनी वेबसाइट पर दिखाएंगे ।

