आज मुंबई में राजधर्म राष्ट्रोदय मुद्दे पर एक बड़े सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में देशभर से आए बड़े बड़े विद्वानों, लेखकों, पत्रकारों, वकीलों, वैज्ञानिकों , व्यवसायियों और पूर्व नौकर साहों ने हिस्सा लिया। इनका उद्देश्य सिर्फ एक सेमिनार में आकर अपनी भावनाओं का आदान-प्रदान करना मात्र नहीं है, बल्कि इनका उद्देश्य राष्ट्र गौरव को पुनर्स्थापित करना है ,देश की भविष्य को गौरव में बनाना है। ये अपने इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए तन मन और धन से समर्पित करने के उद्देश्य से यहां जुटे हैं। राजधर्म और राष्ट्रोदय के इनके इस अभियान का उद्देश्य भारत को एक ऐसे देश के रूप में विकसित करने का है , जहां ताकत और प्रभाव के उपर संविधान और कानून का राज्य हो, जहां नौकरशाह और मंत्री जनता के सेवक हों , जहां जनता अपने आप को गौरवान्वित समझे और व्यक्तिगत हित की जगह राष्ट्रहित की प्रधानता हो। यहां इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की गई कि भारत का एक गौरवमयी इतिहास रहा है इसके बावजूद स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमारे देश में भ्रष्टाचार,अराजकता, पद और सत्ता का दुरुपयोग जैसी कई कुरीतियों ने जड़ जमा लिया है।
इस अवसर पर इंडियन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष निलेश ओझा ने कहा कि हमें अपने इस अभियान को पूरा करने के लिए किसी विशेष मेहनत की जरूरत नहीं है क्योंकि भारतीय संविधान ने पहले ही से ऐसा प्रावधान कर दिया है।भारतीय संविधान के अनुसार देश का हर व्यक्ति बराबर है, चपरासी से लेकर प्रधानमंत्री और वकील से लेकर चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया और खेतिहर मजदूर से लेकर बड़े-बड़े व्यवसायी सभी बराबर हैं। सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट अगर किसी मामले में किसी तथाकथित बड़े लोगों के लिए कोई निर्णय सुनाती है तो इससे जुड़े हर मामले चाहे वह किसी भी व्यक्ति का क्यों ना हो पर यही नियम और निर्णय लागू होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बड़े-बड़े पदों पर आसीन व्यक्ति भी हमारा यानि जनता का सेवक है। उन्होंने कहा कि इन सब का वेतन और सुविधा टैक्स पेयर के पैसे से होता है। देश का प्रत्येक नागरिक किसी ने किसी रूप में देश को टैक्स देता है इसलिए यह सरकार और न्यायपालिका का कर्तव्य है कि वह आम लोगों तक न्याय और तमाम संविधान प्रदत सुविधाओं को पहुंचाएं। उन्होंने लोगों से उच्च पदाधिकारियों को लेकर मन में किसी प्रकार की भ्रांति नहीं रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि ये कोई साहब नहीं है। ये सब जनता के सेवक हैं। फिर उन्होंने दिशा सालियान के मामले को उठाते हुए कहा कि इस मामले में उद्धव ठाकरे आदित्य ठाकरे जैसे बड़े-बड़े लोग जुटे हुए थे, परमवीर सिंह जैसे भ्रष्ट पुलिस पदाधिकारी जुटे हुए थे और हर तरह से इस मामले को दबाने में लगे हुए थे,लेकिन हमने ऐसा नहीं होने दिया और अब इसमें एफआईआर दर्ज हो गया है। ऐसे में किसी को भी हार मान कर बैठने की जरूरत नहीं है, चाहे विपक्ष में कितने ही बड़े लोग क्यों ना हो।
इस अवसर पर क्यू भाईव नेटवर्क के एडिटर इन चीफ आशुतोष पाठक ने सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान के मामले में हुए अन्याय को लेकर जबरदस्त तरीके से अपना पक्ष रखा। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत के अभिनय क्षमता की तारीफ करते हुए कहा कि उनमें किसी भी पात्र के चरित्र को चरितार्थ करने करने की गजब की क्षमता थी। आशुतोष पाठक ने सुशांत सिंह राजपूत द्वारा महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक में किये गए अभिनय को उदाहरण के तौर पर उपस्थित लोगों के बीच रखा। उन्होंने अमिताभ बच्चन, नसरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, जावेद अख्तर जैसी तमाम फिल्मकारों कोई इस मामले में न्याय के पक्ष में खड़ा होने का आह्वान किया। उन्होंने इस मामले कुछ दबाने में आदित्य ठाकरे परमवीर सिंह आदि की मदद करने वाले पत्रकारों को भी जमकर फटकार लगाई। छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन करते हुए आशुतोष पाठक ने कहा कि महाराष्ट्र के मराठे जागृत अवस्था में है और वह सचिन वाजे और परमवीर सिंह जैसे भ्रष्ट लोगों को कामयाब नहीं होने देंगे। ये सब जेल जाएंगे और दिशा सालियान तथा सुशांत सिंह राजपूत के मामले में न्याय होगा। जांच एजेंसियों के द्वारा इस मामले में टालमटोल रवैया अपनाने को लेकर आशुतोष पाठक ने कहा कि इस मामले में आदित्य ठाकरे, परमवीर सिंह जैसे बड़े-बड़े लेकिन भ्रष्ट लोग आरोपी हैं जो अपने प्रभाव का उपयोग कर इस मामले को दबा देने में लगे हुए हैं, जिस कारण इसमें विलंब हो रहा है।लेकिन हम उन्हें ऐसा करने नहीं देंगे और हर हाल में आप सभी के सहयोग से दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिला कर रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्र धर्म और राष्ट्रोदय के अपने संकल्प पर दृढ़ता पूर्वक आगे चलते रहना पड़ेगा और तभी हम अपने उद्देश्य में सफल हो पाएंगे।

