बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल के साइन नहीं? कांग्रेस ने बताई वजह

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विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया।नोटिस में 118 सांसदों के साइन हैं, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इस्ताक्षर नहीं हैं। विपक्ष का आरोप है कि बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका था। साथ ही, आठ MPs को सस्पेंड करने का भी प्रस्ताव रखा।

नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के कुल 118 सांसदों ने साइन किए हैं।लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपे जाने के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही से अलग कर लिया और आसन पर नहीं बैठे।

कांग्रेस सूत्रों से मिली खबर के अनुसार, लोकसभा के LoP और राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन के नोटिस पर साइन नहीं किया, क्योंकि संसदीय लोकतंत्र में LoP के लिए स्पीकर को हटाने की पिटीशन पर साइन करना सही नहीं है।

कांग्रेस की तरफ से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किए गए नो-कॉन्फिडेंस मोशन में कहा गया है, भारत के संविधान के आर्टिकल 94(c) के नियमों के तहत, ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव का नोटिस इसलिए दिया गया है क्योंकि वह लोकसभा का काम खुलेआम एकतरफा तरीके से कर रहे हैं। कई मौकों पर, विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बोलने नहीं दिया गया, जो संसद में उनका बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है।

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने विपक्ष का नोटिस मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को यह नोटिस सौंपा।

अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर भी विपक्षी एकता को झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

कांग्रेस सांसद गोगोई ने कहा कि लोकसभा महासचिव को संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस सौंपा गया है।विपक्ष ने नोटिस में कहा कि बीते दो फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया।यह कोई अकेली घटना नहीं है। करीब-करीब हमेशा ही ऐसा होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता।उन्होंने दावा किया कि गत 3 फरवरी को, विपक्ष के आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया और उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है।

नोटिस में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का नाम लिए बगैर कहा गया है, बीते चार फरवरी 2025 को, बीजेपी के एक सांसद को दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर पूरी तरह आपत्तिजनक और व्यक्तिगत हमले करने की अनुमति दी गई और स्थापित परंपराओं और मर्यादा के मानदंडों की अवहेलना करने के बावजूद उन्हें एक बार भी नहीं टोका गया। हमारे अनुरोध के बावजूद इस सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि वह आदतन ऐसी गतिविधियां करते हैं।

विपक्ष ने ओम बिरला द्वारा सदन में पांच फरवरी को दिए गए उस वक्तव्य का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि चार फरवरी को कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए। नोटिस में आरोप लगाया गया है, ये टिप्पणियां कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ खुले तौर पर झूठे आरोप लगाने वाली और अपमानजनक प्रकृति की हैं। अध्यक्ष, जिन्हें कार्य-संचालन नियमों और संसदीय मर्यादा के मानकों का संरक्षक होना चाहिए, उन्होंने सदन के पटल से ऐसे बयान दिए, जो इस संवैधानिक पद के दुरुपयोग को दर्शाते हैं।विपक्ष ने कहा कि हम लोकसभा अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से सम्मान देते हैं, लेकिन जिस प्रकार से उन्होंने लगातार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया है, उससे हम अत्यंत आहत और व्यथित हैं।

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