बीरेंद्र कुमार झा
स्थाई नौकरी के केजरीवाल उस प्रस्ताव पर दिल्ली कर्मचारी आयोग ने सवाल उठाए हैं, जिसमें निगम की ओर से पांच हजार सफाई कर्मचारियों को पक्का करने का प्रस्ताव पारित किया था। चेयरमैन ने कहा कि अब दोबारा से उन्ही कर्मचारियों को पक्का करने का सवाल कहां से पैदा होता है। उन्होंने कहा कि उनके पास सैकड़ों कर्मचारी संपर्क कर रहे हैं।
निगम के दावे गलत
निगम के दावे को गलत बताते हुए आयोग के चेयरमैन संजय गहलोत ने महापौर को गुमराह करने वाला बताया है। साथ ही मांग की कर्मचारियों को सच्चाई से नियमित किया जाए। उन्होंने कहा है कि महापौर इस मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल को भी गुमराह कर रहे है।वहीं, इस मामले में महापौर कार्यालय का पक्ष मांगा गया, लेकिन वह उपलब्ध नहीं हुआ।
वर्ष 2013-14 में बीजेपी शासन के दौरान 5 हजार पदों का हुआ था सृजन
आयोग के चेयरमैन संजय गहलोत के कहा कि महापौर को अपनी जानकारी दुरुस्त करनी चाहिए। वर्ष 2013-14 में तत्कालिक पूर्वी दिल्ली नगर में स्थायी समिति के चेयरमैन महक सिंह के नेतृत्व में पांच हजार कर्मचारियों को नियमित करने के लिए पांच हजार पदों का सृजन किया गया था।
इसमें तीन हजार पद शाहदरा साउथ और दो हजार पद शाहदरा नार्थ में सृजित हुए थे। निगम ने इन्हें 2004 से नियमित मान लिया था, लेकिन लेखा विभाग के अधिकारियों की हठधर्मी के चलते पेंच फंसाया गया। बाद में कर्मचारी कोर्ट में पहुंचे तो इन कर्मचारियों को भी 2004 से पक्का माना गया।
संवैधानिक बहस की चुनौती बहस की चुनौती
चेयरमैन ने कहा कि अब दोबारा से उन्ही कर्मचारियों को पक्का करने का सवाल कहां से पैदा होता है। उन्होंने कहा कि उनके पास सैकड़ों कर्मचारी संपर्क कर रहे हैं और कर्मचारियों में दुविधा बनी हुई है। उन्होंने महापौर से लेकर आप के निगम प्रभारी को इस संबंध में संवैधानिक बहस की चुनौती भी दी है।

