राफेल विवाद की तरह ही प्रीडेटर ड्रोन पर उठते सवाल ,बीजेपी की बढ़ेगी परेशानी !

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अखिलेश अखिल 

प्रधानमंत्री मोदी के हालिया अमेरिकी दौरे में प्रीडेटर ड्रोन खरीदने का सौदा हुआ है। लेकिन इस ड्रोन को लेकर भारत और अमेरिकी कंपनी में जो करार हुआ है उसमे विवाद खड़ा होते जा रहा है। यह विवाद ठीक राफेल सौदे की तरह ही है। जो खबर सामने आ रही है उसके मुताबिक भारत को अमेरिका की कंपनी से 31 प्रीडेटर ड्रोन खरीदने हैं। इस 31 ड्रोन की प्रारंभिक कीमत तीन अरब डॉलर यानी  300 करोड़ डॉलर तय की गई है इस लिहाज से एक ड्रोन करीब 10 करोड़ डॉलर का यानी आठ सौ करोड़ रुपए का बनता है। इसमें से 16 ड्रोन स्काई गार्डियन हैं यानी वायु सेना के लिए हैं और 15 सी गार्डियन यानी नौसेना के लिए हैं।        

        विपक्ष का आरोप है कि ब्रिटेन ने यही ड्रोन सवा करोड़ पाउंड में यानी करीब 115 से 120 करोड़ रुपए में खरीदा है।  जबकि भारत आठ सौ करोड़ में खरीद रहा है। कीमत में आठ गुना तक अंतर बताया जा रहा है। सोशल मीडिया में यह भी बताया जा रहा है कि जनरल एटॉमिक्स नाम की जो कंपनी इसे बनाती है उसके सीईओ भारतीय मूल के विवेक लाल हैं, जो पहले रिलायंस समूह के साथ काम कर चुके हैं।    
 कंपनी यही ड्रोन अमेरिका को किस कीमत पर बेचती है उसका भी एक आंकड़ा चर्चा में है। कुल मिला कर अंतिम तौर पर सौदा होने से पहले ही सौद के तौर-तरीके और कीमत को लेकर विवाद शुरू हो गया है।         
    इसके साथ ही कई और सवाल भी उठाए जा रहे हैं।कई लोगों ने बताया कि राफेल के सौदे के समय भी तब के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर मौजूद नहीं थे और प्रीडेटर ड्रोन के सौदे के समय भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद नहीं थे। दूसरा सवाल इसकी कीमत को लेकर उठाया जा रहा है। हालांकि रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष जिस कीमत का हवाला दे रहा है वह अंतिम नहीं है। अभी कीमत को लेकर बातचीत होनी है और मोल भाव के बाद ही कीमत तय होगी।
    ऐसे में कहा जा रहा है कि यह ड्रोन सौदा अंतिम रूप लेने से पहले ही विवाद में फंस गया है। आगे इस पर क्या कुछ होता है इस पर सबकी निगाहें टिकी होगी। अब विपक्ष भी पानी तरफ से इसकी जांच करा रहा है। 

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