BRICS Summit 2026: मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से पहले चीन का बड़ा बयान, रिश्तों को लेकर कही ये बात

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PM Modi Xi Jinping Meeting : BRICS Summit 2026 को लेकर राजधानी में गतिविधियां तेज हैं और दुनिया की निगाहें भारत में जुटे शीर्ष नेताओं पर टिकी हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात को लेकर बीजिंग की ओर से अहम प्रतिक्रिया सामने आई है।

चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि दोनों देश आपसी मतभेदों को उचित तरीके से संभालने और द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि मोदी और जिनपिंग की बैठक की तैयारियां चल रही हैं।

राजदूत के मुताबिक, कजान और तियानजिन में दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद यह लगातार तीसरा साल होगा, जब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी आमने-सामने बातचीत करेंगे। चीन की ओर से इस बैठक को दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम संकेत के तौर पर पेश किया गया है।

मतभेदों के समाधान पर चीन का जोर

शू फेइहोंग ने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर दोनों शीर्ष नेताओं द्वारा तय रणनीतिक दिशा को आगे बढ़ाना चाहता है। इसके तहत संवाद और सहयोग को बढ़ाने के साथ उन मुद्दों को भी संभालने पर जोर रहेगा, जिन पर दोनों देशों की राय अलग है।

उन्होंने भारत और चीन के रिश्तों को दीर्घकालिक तथा रणनीतिक नजरिए से देखने की बात कही। साथ ही दोनों देशों के बीच पड़ोसी और सहयोगी के रूप में संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

लगातार तीसरे साल होगी मोदी-शी की मुलाकात

पिछले दो वर्षों में भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क बढ़ा है। 2024 में कजान में BRICS बैठक और 2025 में तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच बातचीत हुई थी। ऐसे में इस साल की प्रस्तावित मुलाकात को दोनों देशों के बीच संवाद की निरंतरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BRICS की मेजबानी पर चीन ने किया भारत का समर्थन

चीनी राजदूत ने BRICS को लेकर भी भारत के पक्ष में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चीन BRICS सहयोग को महत्व देता है और भारत द्वारा इस साल शिखर सम्मेलन की मेजबानी किए जाने का समर्थन करता है।

भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS Summit के बीच यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर व्यापार, टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय संवाद को वैश्विक दक्षिण के लिए भी अहम कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।

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