भारत में विपक्षी राजनीतिक दल अक्सर प्रधानमंत्री को उनके विदेश दौरे को लेकर अपना टारगेट बनाते हुए रहते हैं।वे तो इन्हें भारत का विजिटिंग प्रधानमंत्री तक बता देते हैं जो भारत से ज्यादा विदेशों का ही चक्कर काटते रहते हैं । इस क्रम में उदाहरण देते हुए वे पीएम मोदी के दुनिया भर के देशों में जाने ,लेकिन मणिपुर कभी नहीं जाने की बात करते हैं।
विपक्षी राजनेता पीएम मोदी के विदेश दौरे को लेकर चाहे जो कह ले ,लेकिन पीएम जान की बाजी लगाकर भी विदेशी दौरे पर जाकर भारत को मजबूती प्रदान करने के लिए कोई न कोई बड़ा डील करते रहते हैं। इस क्रम में पीएम मोदी के सेन दौरे के दौरान इस बात की बड़ी चर्चा हुई थी की वहां एक बार पीएम मोदी के जान के ऊपर खतरा था और तब रूस के राष्ट्रपति पुतिन जिन्हें इस बात की खुफिया जानकारी मिल गई थी उन्होंने कुछ देर इंतजार कर उन्हें अपने साथ लिया था और तब वह उसे बैठक में जाकर शामिल हुए थे।
बीते 6 दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इंडोनेशिया ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर थे । या जॉन भी काफी सेंसेटिव जोन माना जाता है खासकर यहां इंग्लैंड कनाडा ऑस्ट्रेलिया न्यू जीलैंड और अमेरिका के बीच हर प्रकार की खुफिया जानकारी साझा की जाती है। औरों से तो नहीं लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के ऊपर भरोसा नहीं किया जा सकता है लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री की इन तीनों देशों की सफल यात्रा लौटी है और उन्होंने वहां भारत की भलाई के लिए कई बड़े दिल की और आज भारत लौट आए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा ऐतिहासिक रही, जिससे भारत के रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया गया। इस दौरे में कई प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल हुईं।
ऑस्ट्रेलिया दौरा
परमाणु ऊर्जा समझौता: दोनों देशों के बीच एक प्रशासनिक व्यवस्था लागू हुई, जो भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम के वाणिज्यिक निर्यात का मार्ग प्रशस्त करती है।
रक्षा और सुरक्षा: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा सहयोग का रोडमैप और साइबर/महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों (PACTS) पर साझेदारी की घोषणा की गई।
हरित ऊर्जा (Green Growth): रूफटॉप सोलर एकेडमी के जरिए 2,000 महिलाओं और युवाओं को सोलर टेक्नीशियन के रूप में प्रशिक्षित करने की पहल की गई, जिससे ‘पीएम सूर्य घर’ योजना को बल मिलेगा।
खेल और शिक्षा: दोनों देशों के बीच खेल सहयोग और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में रचनात्मक आदान-प्रदान के लिए रोडमैप तैयार किया गया।
न्यूज़ीलैंड दौरा
रणनीतिक साझेदारी: चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस पहली ऐतिहासिक यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया।व्यापार और निवेश: भारत और न्यूज़ीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत साल 2030 तक द्विवार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके ₹35,000 करोड़ करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
रक्षा और समुद्री सहयोग: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने हेतु भारतीय नौसेना और न्यूज़ीलैंड रक्षा बल के बीच द्विपक्षीय रसद (लॉजिस्टिक) समर्थन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

