बीरेंद्र कुमार झा
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने फ्रांस के दौरे पर रवाना हो गए हैं।इस बीच रक्षा अधिकारी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि रक्षा अधिग्रहण परिषद में भारतीय नौसेना के लिए 3 अतिरिक्त स्कोपिन श्रेणी के पनडुब्बियों के साथ 22 राफेल एमएस और 4 ट्वीन सीटर ट्रेनर संस्करणों को मिलाकर 26 लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।गौरतलब है कि 14 जुलाई को फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस ‘ बैस्टिल डे ” पैरेड समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया है,जिसमें शिरकत करने के लिए वे रवाना हो गए हैं।
क्या है राफेल एमएस
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राफेल एमएस राफेल लड़ाकू विमान का नौसैनिक संस्करण है। इसका पूरा नाम राफेल मैरिटाइम है। उल्लेखनीय है कि राफेल लड़ाकू विमान के तीन प्रमुख संस्करण हैं। राफेल सिंगल सीट जिसे जमीन से इस्तेमाल किया जा सकता है।राफेल की बात करें तो ये दो सीटों वाला जमीन से इस्तेमाल किया जाने वाला संस्करण है,जबकि राफेल एमएस जो सिंगल सीट कैरियर आधारित संस्करण है। राफेल एमएस का निर्माण फ्रांस की कंपनी द सॉल्ट एविएशन के द्वारा किया गया है।
राफेल की तकनीकी खूबियां
राफेल एमएस की लंबाई 15.27 मीटर और ऊंचाई 5234 मीटर है। राफेल एमएस का वजन 10600 किलोग्राम है।और राफेल एमएस की इंजन क्षमता 4700 किलोग्राम है। हाई एल्टीट्यूड में राफेल एमएसके अधिकतम गति 1912 किलोमीटर प्रति घंटा है तो कम ऊंचाई पर इसकी रफ्तार 1390 किलोमीटर प्रति घंटा है। तीन ड्रॉप टैंक के साथ राफेल एमएस के जैन 3700 किलोमीटर है। राफेल एमएस किसी वाहक (कैरियर) पर उड़ान भर और उतर सकता है।
बताया जा रहा है कि विमान वाहक पोत पर तैनात वर्तमान मिग 29 के की तुलना में राफेल एमएस काफी बेहतर है।प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा से ठीक 1 सप्ताह पहले रक्षा मंत्रालय का रक्षा खरीद बोर्ड राफेल एम जेट खरीदने के सौदे पर विचार कर रहा था। भारतीय वायुसेना के पास पहले ही से 36 राफेल मौजूद है, जिसे जमीन पर हवाई अड्डे पर तैनात किया जा सकता है।
कांग्रेस ने फिर से राफेल का मुद्दा उठाया है
इधर कांग्रेस ने बुधवार को फिर से राफेल सौदा का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने 2016 में लड़ाकू विमान की बिक्री में कथित भ्रष्टाचार पर भारत सरकार से जानकारी मांगी थी और कहा कि सरकार को पूर्ण खुलासा के साथ सामने आना चाहिए ।कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर अब चुप नहीं रह सकती है।
चीन कीआक्रामकता पर बोले पीएम मोदी
चीन की आक्रामकता के बारे में पूछे गए एक सवाल पर फ्रांसीसी समाचार पत्र लेस एकोसी को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत हमेशा वार्ता और कूटनीति के माध्यम से मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने का पक्षधर रहा है।चीन के आक्रामकता के बारे में यह पूछे जाने पर कि क्या रक्षा संस्थाओं में उसके भारी निवेश से क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा है। इस पर मोदी ने कहा कि भारत जिस भविष्य का निर्माण करना चाहता है उसके लिए शांति जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में हमारे हित व्यापक हैं और हमारे इससे संबंध गहरे हैं। मैंने इस क्षेत्र के लिए अपने दृष्टिकोण का एक शब्द में वर्णन किया है – सागर इस क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास से जुड़ा है। हम जिस भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं उसके लिए शांति जरूरी है, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम आधार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है।
रूस यूक्रेन संघर्ष पर पोली पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपसी विश्वास और भरोसे को बनाए रखने के लिए यह पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हमारा मानना है कि इसके माध्यम से ही अस्थाई क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता की दिशा में सकारात्मक योगदान दिया जा सकता है।रूस यूक्रेन संघर्ष पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र ने कहा कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति बोलोदोमिर जेलांस्की से कई बार बात की है और इस संघर्ष को समाप्त करने में मदद करने वाले सभी वास्तविक प्रयासों का समर्थन करने की भारत की इच्छा को रेखांकित किया है।उन्होंने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट पारदर्शी और सुसंगत रहा है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है। हमने दोनों पक्षों से बातचीत और कूटनीति के माध्यम से मुद्दों को हल करने का आग्रह किया है।

