पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकमान्य तिलक की विरासत से सावरकर को जोड़ा, मंच पर थे दिग्गज कांग्रेसी

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बीरेंद्र कुमार झा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुणे में लोकमान्य तिलक नेशनल अवार्ड सम्मानित किया गया है। इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद वे तीसरे प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें यह सम्मान दिया गया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि वह सम्मान के साथ मिली ₹1लाख की राशि को गंगा जी को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि तिलकजी के तो नाम में ही गंगाधर था, इसलिए मैं इस राशि को नमामि गंगे परियोजना के लिए देता हूं।इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमान्य तिलक और वीर सावरकर के रिश्तों का भी जिक्र किया। वीर सावरकर की पढ़ाई की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तिलक जी ने उन्हें बहुत मदद की थी।

दिग्गज कांग्रेशियों के सामने वीर सावरकर की की प्रशंशा

प्रधान मंत्री ने कहा कि तिलकजी की मदद से ही वीर सावरकर जैसी शख्सियत तैयार हो सकी थी।जिस समय प्रधानमंत्री वीर सावरकर के सम्मान में कशीदे पढ़ रहे थे , उस समय कांग्रेस के सीनियर नेता सुशील कुमार शिंदे मंच पर ही मौजूद थे। इसके अलावा आयोजन कर्ता रोहित तिलक भी कांग्रेस के नेता हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काफी समय तक वीर सावरकर और तिलक के रिश्तो की चर्चा की।यह इसलिए अहम है क्योंकि राहुल गांधी समेत कांग्रेस का नेतृत्व अक्सर वीर सावरकर पर हमला करते रहते हैं।वे उनके नाम में वीर शब्द जोड़े जाने का भी विरोध करते रहे हैं। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तिलक के साथ सावरकर का रिश्ता जोड़ना बड़ा मायने रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों को कुछ क्रांतिकारियों के नाम से किसी परियोजना की पहचान होने से भी दिक्कत होती है।

तिलक ने ही दिलाई थी वीर सावरकर को स्कॉलरशिप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकमान्य तिलक इस बात को भी जानते थे कि आजादी का आंदोलन हो या राष्ट्र निर्माण का मिशन, भविष्य की जिम्मेदारी हमेशा युवाओं के कंधे पर ही होती है।वह भारत के भविष्य के लिए शिक्षित और सक्षम युवाओं का निर्माण करना चाहते थे। उनमें प्रतिभाओं को पहचानने की दिव्य शक्ति थी।सावरकर जी की क्षमता को तिलक जी ने ही पहचाना। वह चाहते थे कि सावरकर बाहर जाकर अच्छी पढ़ाई करें और फिर लौटकर आजादी के लिए काम करें।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिटेन में ऐसे ही युवाओं के लिए श्यामजी कृष्ण वर्मा स्कॉलरशिप चलाते थे।तिलक जी ने उनसे सावरकर के लिए स्कॉलरशिप की सिफारिश की थी।

तिलक जी को सुनने आए भीड़ में थे सरदार पटेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तिलक जी की लोकप्रियता इतनी थी कि जब वह अहमदाबाद गए तो वहां 40 हजार से ज्यादा लोग उन्हें सुनने आए थे। उन्हें सुनने आने वाले लोगों में सरदार पटेल भी थे। इसके बाद जब सरदार पटेल अहमदाबाद नगर पालिका के अध्यक्ष बने तो उन्होंने तिलक जी की मूर्ति लगाने का फैसला लिया।इसके लिए सरदार पटेल ने जो जगह चुनी थी, वह जगह विक्टोरिया गार्डन थी। इस गार्डन को 1857 में महारानी विक्टोरिया के सम्मान में बनाया गया था। जब 1929 में यह मूर्ति लगी तो महात्मा गांधी ने इसका लोकार्पण किया। अमदाबाद में रहते हुए मैं कई बार वहां गया और तिलक जी की प्रतिमा के आगे सिर झुकाकर उनका आशीर्वाद लिया।

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