दिमागी नक्सलवाद की जड़ खोदेंगे पीएम मोदी और अमित शाह

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किला के प्राचीन से दिए गए अपने भाषण में एक प्रमुख मुद्दा दिमागी नक्सलवाद का उठाया था।उन्होंने कहा था कि खूनी नक्सलवाद को तो हमने समाप्त कर दिया है,लेकिन अब तेजी से पनप रहे दिमागी नक्सलवादियों से भी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दिमागी नक्सलवाद वाले बयान के बाद कांग्रेस इसके विरोध में उतर गई और वह इसे लोगों के विचारों की अभिव्यक्ति पर एक हमला बताने लगा। लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए कांग्रेस के नेता और पूर्व गृह तथा वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने खुद को दिमागी नक्सली बताया। और इसके बाद पवन खेड़ा और कई अन्य कांग्रेस के नेता भी खुद को दिमागी नक्शा बात कर पीएम मोदी के लाल किला के प्राचीन से स्वतंत्रता दिवस के लिए अवसर पर कहां गए दिमागी नक्सलवाद पर प्रहार करने लगे।

पीएम मोदी की  सरकार ने कांग्रेस के इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई आघात करना नहीं चाहते हैं बल्कि इसके जरिए वे देश के दुश्मनों का सफाई करना चाहते हैं। भारत सरकार ने कहा किस प्रकार के दिमागी नक्सलवाद का सहारा लेकर हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान हमारे देश को तबाह करना चाहता है और उसमें हमारे देश की भी कई लोग भटक कर पाकिस्तान का मोहरा बन जाते हैं और अपने ही देश को नुकसान पहुंचने लगते हैं।

पाकिस्तान सोशल मीडिया का उपयोग मुख्य रूप से प्रोपोगैंडा यानि भ्रामक प्रचार, कट्टरपंथ और युवाओं को गुमराह करने के लिए एक डिजिटल हथियार के रूप में करता है।भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रिपोर्टों के अनुसार, इसके लिए निम्नलिखित पाकिस्तान के द्वारा निम्नलिखित रणनीतियों का उपयोग किया जाता है:

1. फेक न्यूज और भ्रामक नैरेटिव (Fake News & Narratives)टूलकिट और ट्रेंड्स: भारत में किसी संवेदनशील मुद्दे (जैसे जाति, धर्म या राजनीति) पर सोशल मीडिया पर कृत्रिम रूप से नफरत फैलाने वाले हैशटैग ट्रेंड कराए जाते हैं।डीपफेक और मॉर्फ्ड वीडियो: पुराने या अन्य देशों के हिंसात्मक वीडियो को भारत का बताकर शेयर किया जाता है ताकि सांप्रदायिक तनाव पैदा हो।
2. युवाओं का ऑनलाइन ब्रेनवाश किया जाता है।
3. कट्टरपंथ को बढ़ावा: कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों के युवाओं को निशाना बनाने के लिए फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स का सहारा लिया जाता है।
4. आतंकवादी भर्ती: युवाओं की धार्मिक या व्यक्तिगत भावनाओं को भड़काकर उन्हें आतंकवादी संगठनों (जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद) में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता है।
5 हाइब्रिड वॉरफेयर और बॉट नेटवर्क और फर्जी अकाउंट्स: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) और उनके समर्थित साइबर सेल हजारों फर्जी भारतीय नामों वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स चलाते हैं।
6.आंतरिक फूट डालना: इन अकाउंट्स का मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों (जैसे हिंदू-मुस्लिम, विभिन्न जातियां या क्षेत्र) के बीच अविश्वास और दुश्मनी पैदा करना है।

7. साइबर जासूसी और हनीट्रैप सुरक्षा बलों को निशाना बनाना: भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस कर्मियों को सोशल मीडिया पर खूबसूरत महिलाओं के फर्जी प्रोफाइल बनाकर फंसाया जाता है ।
8. गोपनीय जानकारी चुराना: इसके जरिए संवेदनशील सैन्य ठिकानों, मूवमेंट और रणनीतिक जानकारियों को हासिल करने की कोशिश की जाती है।
9. अफवाहें फैलाकर अशांति पैदा करना, आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता: किसी बड़ी घटना या महामारी के समय अफवाहें फैलाकर देश में डर और भगदड़ का माहौल बनाना।

10. सुरक्षा बलों की छवि खराब करना: भारतीय सेना और पुलिस के खिलाफ झूठे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना।

पीएम मोदी के द्वारा दिमागी नक्सलवाद की बात लाल किला के प्राचीन से करने के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान समर्थित दुष्प्रचार, फेक न्यूज़ और डिजिटल प्रोपेगैंडा को रोकने के लिए कई कड़े और रणनीतिक कदम उठाए हैं। भारतीय गृह मंत्रालय (MHA) सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इन गतिविधियों पर लगातार एक्शन ले रहा है।अमित शाह द्वारा पाकिस्तान के दुष्प्रचार को रोकने के लिए उठाए गए मुख्य कदम निम्नलिखित हैं:
1. डिजिटल टेरर और रिक्रूटमेंट नेटवर्क पर कार्रवाईशाहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) का खात्मा: अगस्त 2026 में सुरक्षा एजेंसियों ने देशव्यापी कार्रवाई कर पाकिस्तान समर्थित ‘शाहजाद भट्टी नेटवर्क’ को ध्वस्त किया। यह नेटवर्क सोशल मीडिया (जैसे Instagram और Facebook) का उपयोग कर भारतीय युवाओं को बरगलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती करने का काम कर रहा था। इसके तहत 200 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।2. प्रोपेगैंडा अकाउंट्स और चैनलों को ब्लॉक कोऑर्डिनेटेड डिसइन्फॉर्मेशन नेटवर्क पर बैन: गृह मंत्रालय के इनपुट पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पाकिस्तान से संचालित होने वाले दर्जनों YouTube चैनलों, फेसबुक पेजों और वेबसाइटों को ब्लॉक किया है।ये चैनल कश्मीर, भारतीय सेना और आंतरिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर लगातार झूठी और भड़काऊ सामग्री फैला रहे थे।3. AI और डीपफेक प्रोपेगैंडा के खिलाफ कड़ा रुखफैक्ट-चेक सिस्टम को मजबूत करना: पाकिस्तानी हैंडल द्वारा भारतीय नेताओं और सेना को लेकर बनाए जा रहे AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो का मुकाबला करने के लिए PIB Fact Check जैसी केंद्रीय एजेंसियों को तुरंत अलर्ट जारी करने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ऐसे कंटेंट हटवाने के निर्देश दिए गए हैं।4. सीमावर्ती राज्यों और स्थानीय पुलिस को निर्देशकड़ी निगरानी के आदेश: अमित शाह ने पाकिस्तान की सीमा से लगे राज्यों (जैसे जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात) के मुख्यमंत्रियों और डीजीपी (DGPs) को सोशल मीडिया पर देश-विरोधी प्रोपेगैंडा पर सख्त नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
2. त्वरित कानूनी कार्रवाई: भ्रामक जानकारी फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करने को कहा गया है।
5. वैश्विक खुफिया रणनीति (Intelligence Coordination Strategy)मित्र देशों के साथ समन्वय: गृह मंत्री ने फेक न्यूज़ और दुष्प्रचार से निपटने के लिए मित्र देशों के साथ मिलकर एक मजबूत खुफिया तंत्र (Intelligence Strategy) विकसित करने पर जोर दिया है। इसके तहत विदेशों से संचालित होने वाले भारत-विरोधी डिजिटल नेटवर्क पर आक्रामक डिजिटल और कानूनी कार्रवाई (Offensive Measures) शामिल हैं।

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