न्यूज़ डेस्क
कभी लालू प्रसाद के ख़ास रहे पप्पू यादव अब मुश्किल में फंसते जा रहे हैं। उनकी अगली राजनीति
का क्या होगा यह तो कोई नहीं जानता लेकिन फिलहाल उन्हें 20 साल पुराने एक मामले में एमपी -एमएलए कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाकर उन्हें सकते में डाल दिया है। हालांकि पप्पू यादव को तत्काल जमानत भी मिल गई है लेकिन इस मामले के बाद बिहार की राजनीति गर्म हो गई है।
बता दें कि एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी आदि देव ने पप्पू यादव को आईपीसी की तीन धाराओं में दोषी करार दिया है। इसके बाद पप्पू यादव को एक साल की कैद और 5 हजार रूपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। वहीं सजा के इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील करने के लिए पप्पू यादव को औपबंधिक जमानत पर रिहा कर दिया गया। मामला पटना जिले के फतुहां में हुए एक कांड से जुड़ा है।
जिस कांड में पप्पू याद को सजा सुनाई गई है वो फतुहां थाना इलाके में हुआ था। इसका एफआईआर नंबर 70/2003 है। 17 जून 2003 को इसी कांड में पप्पू यादव के अलावा 21 लोगों को नामजद किया गया था। जबकि एफआईआर में 150 से 200 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया था। उस वक्त फतुहा थाना इलाके से एक युवक गायब हो गया था। उस युवक की बरामदगी को लेकर पप्पू यादव पर समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया था। एमपी एमएलए कोर्ट ने आईपीसी की धारा 353, 323 व 147 के तहत पप्पू यादव को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
पप्पू यादव के वकील अजय कुमार के मुताबिक फतुहा में एक युवक का अपहरण कर लिया गया था। उस युवक को सकुशल बरामद करने के लिए पप्पू यादव ने समर्थकों के साथ 16 मार्च 2003 को धरना प्रर्दशन किया था। इसी प्रर्दशन को लेकर पुलिस ने एक मुकदमा दायर किया था। बाद में चार्जशीट भी सबमिट की गई थी। पप्पू यादव के वकील अजय कुमार ने बताया कि वो सजा के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील करेंगे।

