बिहार में ओवैसी की विस्तार योजना : राजद के वोट बैंक पर असर पड़ने की सम्भावना 

0
172

अखिलेश अखिल
राजनीति अपने हिसाब से चल रही है। कर्नाटक समेत कई चुनावी राज्यों में जहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई है वहां अब केजरीवाल और ओवैसी भी अपनी दुदुम्भी बजा रहे हैं। कर्नाटक ,मध्यप्रदेश ,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में केजरीवाल और ओवैसी की कोई पहचान नहीं है लेकिन ये दोनों दल भी वहाँ पहुँच कर अपनी जमीन तलाश रहे हैं। आप पार्टी को लगता है कि गोवा और गुजरात की तरह ही कर्नाटक समेत सभी चुनावी राज्यों में वे बीजेपी और कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं वही ओवैसी को भी लग रहा है कि धीरे -धीरे उसकी पहुँच कई राज्यों में हो रही है और उसकी पहचान भी उगते सूरज जैसी है। अब ओवैसी की पार्टी बिहार में बड़ा खेल करने को तैयार है। बिहार में ओवैसी अपनी पार्टी एआईएमआईएम का विस्तार करना छह रहे हैं और इसको लेकर बिहार के सीमांचल इलाके में लगातार वे दौरा भी कर रहे हैं।

ओवैसी ने अपने बिहार दौरे के क्रम में विधानसभा चुनाव में करीब 50 सीट पर मजबूती से चुनाव लड़ने की घोषणा से इसके संकेत भी दिए हैं। ओवैसी की इस घोषणा से भाजपा को फायदा और महागठबंधन को नुकसान पहुंचने के आसार लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि ओवैसी की पार्टी आमतौर पर मुसलमानों की पार्टी मानी जाती है और यादव और मुसलमान राजद का वोट बैंक माना जाता है।ऐसे में ओवैसी की पार्टी अगर मजबूत होती है तो तय है कि एआईएमआईएम को जो

इधर, बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनाए जाने के बाद भाजपा भी बिहार में संगठन को मजबूत करने की नजर है।बिहार के सीमांचल इलाके में पिछले दो दिनों की यात्रा के दौरान ओवैसी ने पदयात्राएं की है और जनसभा को भी संबोधित किया है।ओवैसी ने कहा कि बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी 50 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी माना कि पहले बिहार में कम सीटों पर चुनाव

ओवैसी ने कहा कि इस बार लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी केवल किशनगंज नहीं बल्कि और भी कई सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरेगी। ओवैसी की इस घोषणा के बाद राजद और जदयू के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। उन्होंने साफ कह दिया कि इस बार यह कोताही नहीं होगी, ना ही हम सीमांचल तक सीमित रहेंगे।

ओवैसी की पार्टी को 2020 के विधानसभा चुनाव में पांच सीटों पर सफलता मिली थी, हालांकि उनके जीते हुए 5 में से 4 विधायक को राजद ने अपने पाले में कर लिया। ओवैसी इसको भूल नहीं पाए हैं और इस बार राजद को पटखनी देने के लिए मैदान में उतर आए हैं ऐसे में ओवैसी के निशाने पर इस बार भाजपा से ज्यादा राजद रही है। संभावना जताई जा रही है ओवैसी किसी गठबंधन में शामिल नहीं होंगे और अकेले चुनावी मैदान में उतरकर राजनीतिक दलों का खेल बिगाड़ेंगे।

गौरतलब है कि भाजपा की नजर भी सीमांचल पर है। भाजपा के नेता अमित शाह भी सीमांचल का दौरा कर चुके हैं।बहरहाल, एआईएमआईएम के अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा जरूर कर दी है, लेकिन इसमें से कितनी सीटों पर पार्टी सफल हो पाएगी यह तो बाद में पता चलेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here