उड़ीसा : रूसी सांसद पावेल एंटोव का विसरा नहीं रखा गया सुरक्षित,मौत का मौत का रहस्य गहराया

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भुवनेश्वर (बीरेंद्र कुमार): उड़ीसा के रायगढ़ स्थित होटल साई इंटरनेशनल में रूसी सांसद पावेल एंटोव और उनके मित्र व्लादिमीर बुडेनोव की मौत का रहस्य गहराता चला जा रहा है। उड़ीसा पुलिस की उच्चस्तरीय टीम इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच कर रही है। हालांकि रूसी संसद का विसरा सुरक्षित नहीं रखे जाने और आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार कर दिए जाने से पुलिस की जांच पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

रायगड़ा की मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी का बयान

रूसी राजनयिक की हत्या के बाद पुलिस का बयान आया था कि वह दोनों रूसी नागरिकों की विसरा की जांच कराएगी। इस संबंध में रायगड़ा के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर लाल मोहन रावत राय ने बताया कि जिला मुख्यालय अस्पताल में ब्लादिमीर बुडेनोव का पोस्टमार्टम 24 दिसंबर को और पावेल एंटोव का पोस्टमार्टम 26 दिसंबर को किया गया था। सीएमओ ने बताया कि बुडेनोव के विसरा को संरक्षित किया गया है जबकि पावेल एंटोव के शव का विसरा संरक्षित नहीं किया गया है।

उन्होंने बताया कि बुडानोव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण शरीर के विभिन्न अंगों में आंतरिक चोट लगने को बता है। माना जा रहा है कि होटल की तीसरी मंजिल से गिरने की वजह से उनकी मौत हुई है। वहीं पावेल एंटोव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण दिल का दौरा पड़ना बताया गया है। इधर रूसी पर्यटक के साथ आने वाले दंपत्ति तुरोव मिखाईल तथा उनकी पत्नी पंसेको मितालिया से पुलिस पूछताछ कर रही है। दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अंबाजी ने रूसी सांसद की मौत पर कहा है कि उड़ीसा पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने तक किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होगा। दोनों की मौत दुखद है हम लोग मामले को देख रहे हैं।

एसपी ने बताया अंतिम संस्कार के लिए परिवार ने दी थी अनुमति

रायगड़ा के एसपी विवेकानंद शर्मा ने बताया कि दोनों रूसी नागरिकों के परिवार के सदस्यों ने उनका अंतिम संस्कार उड़ीसा में ही कर दिए जाने की अनुमति का पत्र रूसी दूतावास के माध्यम से पुलिस को भेजा था। इस कारण दोनों का अंतिम संस्कार यही कर दिया गया।

हर केस में जरूरी नहीं है विसरा जांच

विसरा जांच को लेकर दिल्ली के फॉरेंसिक एक्सपर्ट राजीव कुमार का कहना है कि ऐसे मामले में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों को मौत के सही कारण का पता नहीं लग पाता है अथवा मौत के सही कारण का पता लग जाने के बावजूद परिजन द्वारा संदेश जाहिर करते हुए कोई आरोप लगाया जाता है तब उस मामले में डॉ विसरा जांच भी कराने की संस्तुति करते हैं।

पुलिस की उसमें कोई भूमिका नहीं होती है। पुलिस को पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के जरिए केवल मौत के सही कारण का पता लगाना होता है। यह जांच हर केस में अनिवार्य नहीं होता है।डॉक्टरों को अगर संदेह होता है कि मृतक को जहरीला पदार्थ खिला या पिला दिया गया हो, या फिर उसने खुद खा पी लिया हो,ऐसे मामलों में मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए उसका विसरा सुरक्षित रखा जाता है। हर केस में मौत का पता लगाना जरूरी होता है, लेकिन हर केस में विसरा जांच जरूरी नहीं होता है।

एनसीआईबी की टीम जांच के लिए पहुंची

इस बीच मामले की जांच के लिए एनसीआइबी (राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो) की टीम भी रायगड़ा पहुंच चुकी है। टीम ने पुलिस से मौत के मामले से जुड़े दस्तावेज, रूसी राजदूत से सहमति पत्र और ऑटोप्सी से जुड़े ईमेल और अन्य अहम जानकारियां हासिल की है। इसके अलावा उड़ीसा पुलिस के क्राइम ब्रांच की टीम ने 2 केस दर्ज कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित रायगड़ा थाने से मामले से जुड़े सभी दस्तावेज एकत्रित कर घटना की जांच शुरू कर दी है। पावेल और बूढ़ेनोव के साथ रूस से आए उनके मित्र दंपत्ति तथा टूरिस्ट गाइड जितेंद्र सिंह और और कार चालक से भी पूछताछ कर रही रही है।

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