अखिलेश अखिल
मुंबई में विपक्षी एकता की बैठक कल जैसे ही शुरू हुई वैसे ही दिल्ली में सरकार ने एक पैनिक बटन दबाया। अचानक संसद के विशेष सत्र की बात कही गई। संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि 18 से 22 सितम्बर तक संसद का विशेष अधिवेशन चलेगा। सुचना इतनी ही भर थी। फिर तो क्या हुआ दिल्ली से मुंबई और देश के तमाम राज्यों तक राजनीति गर्म हुई। तरह -तरह की बातें सामने आने लगी। मुंबई में लोगों का जमघट हो रहा था और उनके राज्यों से नेताओं के फ़ोन आ रहे थे और संसद के विशेष सत्र की बात कही जा रही थी।
अभी तक किसी को यह पता नहीं है कि यह बैठक किस लिए बुलाई गई है। बीजेपी के भीतर के लोग भी नहीं जान रहे हैं कि इस ख़ास बैठक का उदेश्य क्या है और उसकी परिणति क्या होनी है। कई लोग तो यह भी कह रहे हैं कि संसदीय कार्य मंत्री को भी बैठक बुलाने का उदेश्य शायद ही पता हो। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि ऐसे नोटबंदी ,जीएसटी से लेकर कई फसलों की जानकारी किसी भी नेता और मंत्री को नहीं थी यह बैठक भी कुछ वैसा ही है।
तरह -तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कोई वन नेशन वन इलेक्शन की बात कर रहा है क्यों सरकार ने इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक अमिति का गठन कर दिया है। कुछ लोग लोकसभा चुनाव में मद्दे नजर इस बैठक को देख रहे हैं तो कुछ लोगों का कहना है कि चुनाव से पहले सरकार कुछ बिलों को पास करा लेना चाहती है। खबर यह भी है कि ईडी निदेशक संजय मिश्रा को कोई बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए भी कोई बिल लाया जा सकता है। कह सकते हैं कि सबकी अपनी -अपनी कहानी।
लेकिन अब उधर मुंबई से विपक्ष ने सरकार पर हमला किया है। और अचानक संसद के विशेष सत्र को लेकर तानाशाही प्रवृति कहा है और सरकार की आलोचना की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय संसदीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चुटकी ली है।उन्होंने कहा, ‘हमने तो सिर्फ संसद का सत्र ही बुलाया है वो इतना डर क्यों रहे हैं। ‘
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि संसद का विशेष सत्र कुछ अहम मुद्दों पर बातचीत करने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा, ‘हम अगले 2-3 दिनों में संसद सत्र का एजेंडा सबके साथ शेयर कर देंगे।’ यह पूछे जाने पर कि अचानक विशेष सत्र बुलाए जाने और एक देश, एक चुनाव को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। इसके जवाब में जोशी ने कहा, ‘अगर वह बिल आता भी है तो उसको लेकर सदन में चर्चा की जाएगी। इसको लेकर वह इतना डर क्यों रहे हैं। उनको डरना नहीं चाहिए।
एक देश, एक चुनाव’ के मुद्दे पर पूछे गए अगले सवाल में उन्होंने कहा, अगर बिल आएगा तो सदन में चर्चा की जाएगी और ऐसा नहीं है कि हम उस बिल को कल से ही लागू करने जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘अगर एक विकासशील देश में लोकतंत्र का भी विकास होता है तो इसमें क्या बुराई है, 1960-67 में एक साथ चुनाव कराए गए थे। एक साथ चुनाव से देश मजबूत होता है। ‘
बता दें कि सरकार ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की संभावनाएं तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। सरकार ने 18 सितंबर से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के एक दिन बाद यह कदम सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने पर कई साल से दृढ़ता से जोर दे रहे हैं और इस संबंध में संभावनाओं पर विचार का जिम्मा कोविंद को सौंपने का निर्णय, चुनाव संबंधी अपने दृष्टिकोण के विषय में सरकार की गंभीरता को रेखांकित करता है।
नवंबर-दिसंबर में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसके बाद अगले साल मई-जून में लोकसभा चुनाव हैं। सरकार के इस कदम से आम चुनाव और कुछ राज्यों के चुनाव को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी खुली हैं जो लोकसभा चुनावों के बाद में या साथ होने हैं। लेकिन यह तो एक बात है। असली बात क्या है इसकी सही जानकारी तो तभी लगेगी जब सरकार मुद्दों का खुलासा करेगी।

