बीजेपी और बीएसपी को एक साथ झटका देने की तैयारी में जुटी समाजवादी पार्टी

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बीरेंद्र कुमार झा

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद पार्टी ने बीजेपी (BJP) के खिलाफ बनाए गए प्लान पर काम भी शुरू कर दिया है।सपा यूपी में दलित वोट बैंक के सहारे चुनावी मैदान में साइकिल दौड़ाने की तैयारी कर रही है। इस वोट बैंक को हासिल करने के लिए इसने पार्टी के पुराने चेहरे अवधेश प्रसाद और रामजी सुमन लाल को चेहरा बनाया गया।

सपा की रणनीति के अनुसार यदि दलित वोट बैंक उसके साथ जुड़ जाए तो 2024 की सियासी राह आसान हो सकती है।. 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सपा ने लोहियावादियों और अंबेडकरवादियों को एक मंच पर लाने की शुरुआत की थी. पार्टी ने डॉ अंबेडकर के सिद्धांत और सपनों को पूरा करने की वकालत करते हुए अंबेडकर वाहिनी की घोषणा की थी।इसके बाद विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट बैंक करीब 32 फीसदी तक पहुंच गया।

इन नेताओं को दी दी जगह

समाजवादी पार्टी की कोलकाता में चली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मंच पर अखिलेश यादव के बगल में नौ बार के विधायक अवधेश प्रसाद और पूर्व सांसद राम जी सुमन नजर आए। अयोध्या निवासी अवधेश प्रसाद पासी बिरादरी से और आगरा के रामजी लाल सुमन जाटव है। यह दोनों जातियां दलित राजनीति में प्रभावी मानी जाती हैं।

नए और पुराने दोनो दलित नेता पर है नजर ।

सपा एक तरफ पुराने समय के दलित नेताओं को साथ लेकर चल रही है तो दूसरी तरफ युवा दलित नेताओं पर भी फोकस कर रही है।गोरखपुर से बृजेश कुमार गौतम को जिला अध्यक्ष बनाया है, जो बसपा से आए हैं। इसके साथ युवा चेहरे के रूप में रामकरण निर्मल, चंद्र शेखर चौधरी और मनोज पासवान भी सक्रिय हैं। रामपुर उपचुनाव में मंच पर अखिलेश यादव के बगल में दलित नेता चंद्र शेखर आजाद बैठे नजर आए थे।

बीएसपी से दलित नेताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास

ध्यान देने वाली बात ये है कि बीएसपी को 2012 में करीब 26 फीसदी, 2017 में 22.4 फीसदी और 2022 में करीब 12.7 फीसदी वोट मिला था।जबकि प्रदेश में करीब 11 फीसदी जाटव, तीन फीसदी पासी और दो फीसदी अन्य दलित जातियां हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का कहना कि समाजवादी पार्टी की नजर बीएसपी के घटते दलित वोट बैंक पर है। समाजवादी पार्टी बीएसपी के दलितों के पांच से छह फीसदी वोट बैंक को अपनी पार्टी से जोड़ने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है। बीएसपी के तमाम पुराने बड़े नेता उससे अलग हो भी चुके हैं, इनमें से कुछ सपा के पास भी आए हैं।

 

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