तेल की कमी होगी पूरी,पानी और कार्बन डाईऑक्साइड से ईंधन बनाने वाला प्लांट शुरू

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अमेरिका के वाशिंगटन में अमेरिका का पहला ऐसा कमर्शियल प्लांट शुरू हुआ है, जहां हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO2) और ग्रीन बिजली का इस्तेमाल करके हवाई जहाज का ईंधन बनाया जाएगा। बता दें कि ग्रीन बिजली प्रकृति के उन साधनों से बनाई जाती है, जो कभी खत्म नहीं होते जैसे सौर ऊर्जा। यह अपने तरह का पहला बड़ा और कमर्शियल प्लांट है। यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो भविष्य में हवाई जहाज का ईंधन बनाने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकता है।

कैलिफोर्निया की इंडस्ट्रीयल टेक्नोलॉजी कंपनी ट्वेल्व (Twelve) ने वाशिंगटन के मोसेस लेक में एयरप्लांट वन का उद्घाटन किया है। इस फैक्ट्री में ई-जेट ईंधन (e-Jet Fuel) बनाया जाता है।
यह इंसानों द्वारा लैब या फैक्ट्री में तैयार किया गया एक ऐसा आर्टिफिशयल ईंधन है, जो पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और ग्रीन बिजली (जैसे सोलर या विंड एनर्जी) को एक खास तरीके से आपस में मिलाया जाता है।
बिजली की मदद से गैस और पानी को लिक्विड (तरल ईंधन) में बदलने की इस तकनीक को ‘इलेक्ट्रिसिटी-टू-लिक्विड’ (Power-to-Liquid) प्रोसेस कहते हैं।

(इलेक्ट्रिसिटी-टू-लिक्विड) बनाने की यह तकनीक अब सिर्फ प्रयोगशालाओं या टेस्टिंग तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू हो गया है। यह तकनीक देश के भीतर ही ईंधन बनाने का एक ऐसा नया तरीका है, जिसके लिए जमीन से कच्चा तेल निकालने की जरूरत नहीं है। हवाई जहाज के ईंधन के अलावा, यह फैक्ट्री ‘ई-नैफ्था’ (e-Naphtha) भी बनाती है। यह एक ऐसा केमिकल है, जिससे रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाली हजारों चीजें बनाईं की जाती हैं।

यह तकनीक अभी डेवलप हो रहे कई सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) तरीकों से अलग है। SAF बनाने के ज्यादातर तरीकों में बायोलॉजिकल फीडस्टॉक का इस्तेमाल होता है, जैसे इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल, खेती का कचरा और दूसरे ऑर्गेनिक मटीरियल। इन संसाधनों के साथ जमीन की उपलब्धता और सप्लाई से जुड़ी कई सीमाएं हैं। इसके बजाय, पावर-टू-लिक्विड में प्रोडक्शन में कैप्चर की गई कार्बन डाइऑक्साइड और रिन्यूएबल बिजली का इस्तेमाल होता है।

इस नई तकनीक में कंपनियों के साथ बिजली का लंबा सौदा कर लिया जाता है। इससे ईंधन बनाने का खर्च लंबे समय तक एक जैसा बना रहता है और कीमतों में बार-बार बदलाव नहीं होता। Twelve का दावा है कि उसके इस नए ई-जेट ईंधन (e-Jet Fuel) का इस्तेमाल करने से बनने से लेकर हवाई जहाज में जलने तक कुल प्रदूषण, आम ईंधन के मुकाबले 90% तक कम हो जाएगा।

AirPlant One, E-Naphtha भी बनाता है, जो पेट्रोलियम से बनने वाले नैफ्था का एक सिंथेटिक ऑप्शन है। AirPlant One के लॉन्च से फ्यूल बनाने का एक नया मॉडल सामने आया है। ट्रेडिशनल हवाई जहाज के ईंधन की कीमतें अक्सर दुनिया के हालातों, लड़ाइयों और कच्चे तेल के बाजार के उतार-चढ़ाव की वजह से बदलती रहती हैं।

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