बिहार में सबसे बड़ा सामाजिक समूह ओबीसी वर्ग है ,राजनीति तो बदलेगी ही

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अखिलेश अखिल

बिहार सरकार ने गाँधी जयंती के अवसर पर जातिगत आंकड़े को जैसे ही जारी किया देश में हलचल मच गई। वैसे आज देश के भीतर कई घटनाएं घटी। दो राज्यों में पीएम मोदी की सभाएं हुई लेकिन उत्तर से दक्षिण तक की राजनीति बिहार के जातिगत आंकड़ों के सामने कमजोर हो गई। कल रामलीला मैदान में करब पांच लाख लोगों की भीड़ ओपीएस की मांग को लेकर इकठ्ठा हुई थी लेकिसी भी चैनल और अखबारों में उसको जगह न के बराबर दी गई। कह सकते हैं कि मुख्य धारा की मीडिया ने उस खबर को दबा दिया लेकिन आज नीतीश सरकार ने आंकड़ों को जारी करके एक नया बहस शुरू कर दया है। इन आंकड़ों की धमक दक्षिण भारत में भी सुनाई देने लगी है। उत्तर भारत में इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने वाला है क्योंकि यहाँ ही सबसे ज्यादा जातिगत समीकरण बैठाये जाते हैं।
               सरकार की तरफ से जारी किए गए रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में राज्य की कुल आबादी 13 करोड़ से ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी 36 फीसदी है और पिछड़ा वर्ग की संख्या 27 परसेंट है। साफ है कि सबसे बड़ा सामाजिक समूह ओबीसी वर्ग का है, जिसकी संख्या 63 फीसदी है। अब इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद नीतीश कुमार और लालू यादव की पार्टी आरजेडी दोनों ही मिलकर इसका श्रेय ले रहे हैं। वहीं भाजपा भी समर्थन की बात करके ओबीसी को सबसे ज्यादा महत्व देने वाली पार्टी का दावा कर रही है। साफ है कि 2024 के आम चुनाव से पहले ओबीसी पॉलिटिक्स केंद्रीय भूमिका में आ गई है।
                    बिहार में आई जातीय जनगणना की रिपोर्ट का देश में असर पड़ना तय माना जा रहा है। इसके पीछे कारण ये है कि बिहार से सटे यूपी , झारखंड और खासकर हिंदी बेल्ट वाले राज्यों में जातीय जनगणना कराने की मांग और तेज हो जाएगी। यूपी में सपा जहां 2022 के यूपी चुनाव में ही 15 बनाम 85 का नारा दे चुकी है। वहीं, अब एक बार फिर से 2024 में यूपी, बिहार जैसे हिंदी पट्टी के राज्यों में ओबीसी कार्ड तेज हो सकता है। सबसे मजे की बात है कि अब कांग्रेस भी लगातार जातिगत जनगणना की मांग कर रही है। राहुल गाँधी बार -बार कह रहे हैं कि एक्सरे करने की जरूरत है ताकि पता लगे कि किस समुदाय की कितनी आबादी है ताकि उसके मुताबिक योजनायें बनाई जाए।
                     इसका असर यूपी, बिहार से आगे राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा जैसे प्रदेशों में भी दिख सकता है। यानी 2024 के लिए विपक्ष को हथियार मिल चुका है। बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब संसद से लेकर सड़क तक जातिगत जनगणना कराने के लिए सरकार पर दबाव डालने के साथ ये वादा भी कर रहे है कि अगर केंद्र के साथ ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार आती है तो वह जातिगत जनगणना कराएगी।
                  इस रिपोर्ट के बाद नीतीश कुमार और लालू यादव जैसे नेता यह प्रचार करेंगे कि ओबीसी की आबादी 60 परसेंट से ज्यादा है, जबकि आरक्षण 27 फीसदी ही मिलता है। इसे बढ़ाना चाहिए और सरकार अन्याय कर रही है। इस तरह भाजपा को ओबीसी पर घेरने की कोशिश होगी। एक तरह से 2024 से पहले विपक्ष को एक हथियार मिल गया है।
बता दें कि बीजेपी हिंदी बेल्ट के कई राज्यों में या तो सरकार में है या प्रमुख विपक्षी पार्टी है। ऐसे में रिपोर्ट सामने आने के बाद उसकी मुश्किलें बढ़ गई है।क्योंकि अगर वह दूसरे राज्यों में जातिगत जनगणना कराने का वादा करती है तो उस पर हिंदुत्व के मुद्दे से भटकने का आरोप लगेगा और अगर वह जनगणना का वादा नहीं करती है तो विपक्ष आसानी से उस पर ओबीसी विरोधी होनेे का आरोप लगाएगा। हालांकि बीजेपी शुरू से खुद को ओबीसी समाज की सबसे बड़ी हितैषी बताती है। खुद प्रधानमंत्री मोदी कई मौकों पर अपनी जाती को लेकर बयान दे चुके हैं।

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