क्या आप सोच सकते हैं कि जिस मैसेज को टाइप करने में आपको समय लगता है, लेकिन अगर वही मैसेज आपके सोचते ही स्क्रीन पर छप जाए, तो कैसा हो? सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन AI की दुनिया में अब यह हकीकत बनने जा रहा है। टेक इंडस्ट्री में अब तक ऑटोमेशन और चैटबॉट्स
का राज था, लेकिन अब एक AI स्टार्टअप टेलीपैथी यानी दिमाग पढ़ने वाली टेक्नोलॉजी पर दांव लगा रहा है।सबसे खास बात यह है कि आपकी सोच को समझने के लिए इस कंपनी को आपके दिमाग के डेटा की जरूरत है और इसके बदले वह आपको पैसे भी दे रही है।
अमेरिकी टेक स्टार्टअप Conduit अब सीधे टेलीपैथी यानी सिर्फ विचारों के जरिए मशीनें चलाने की तकनीक पर काम कर रहा है।इसके लिए कंपनी एक ऐसा मॉडल तैयार कर रही है जो इंसानी सोच को सीधे टेक्स्ट में बदल सके।
हालांकि, इस मॉडल को ट्रेनिंग देने के लिए काफी ज्यादा ब्रेन डेटा की जरूरत है। इसी डेटा को इकट्ठा करने के लिए कंपनी आम लोगों को पैसे देकर उनके विचार पढ़ने का ऑफर दे रही है।रिसर्चर नाओमी बाशकांस्की, जो हाल ही में Conduit से जुड़ी हैं, ने बताया कि उनकी टीम नॉन-इन्वेंसिव न्यूरल डेटा का इस्तेमाल करके थॉट-टू-टेक्स्ट मॉडल तैयार कर रही है।
एलन मस्क की Neuralink की तरह Conduit दिमाग में कोई चिप या सर्जरी करने की जगह बिना किसी चीर-फाड़ वाली नॉन-इन्वेंसिव टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है। डेटा कलेक्शन के लिए लोगों को कंपनी के ऑफिस जाना होगा, जहां उन्हें इलेक्ट्रोड से लैस लगभग 2 किलोग्राम का एक हेलमेट पहनाया जाएगा।
हेलमेट पहनकर 2 घंटे तक AI से बातचीत करने या टाइपिंग करने के बदले लोगों को करीब ₹5,200 रुपये दिए जा रहे हैं। इसके लिए बस एक ही शर्त रखी गई है कि लोगों को बिना की बोर्ड देखे टाइपिंग करना आना चाहिए। एक व्यक्ति अधिकतम 32 सेशंस में शामिल हो सकता है।सेशंस के दौरान किसी भी विषय पर बात या टाइप कर सकते हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा न्यूरल डेटा रिकॉर्ड किया जा सके।फिलहाल अभी यह सर्विस अमेरिका में ही है।
गौरतलब है कि हाल ही में Meta ने भी अपने Brain2Qwerty सिस्टम का नया वर्जन पेश किया है, जो ब्रेन स्कैन को सीधे टेक्स्ट में बदल सकता है। इसका मकसद न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित लोगों की मदद करना है।वहीं दूसरी तरफ, Neuralink के चिप इंप्लांट की सहायता से मरीज पहले ही सिर्फ सोच के जरिए गेम खेलने और टाइपिंग करने में सफलता पा चुके हैं। Conduit का यह नया प्रयोग इस तकनीक को बिना किसी सर्जरी के आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

