अब घर की ईंटें बनाएंगी बिजली, पुराने मकानों में भी कामयाब है नई तकनीक

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घर को मजबूती देने के लिए ईंटों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है लेकिन अब घरों या इमारतों में इस्तेमाल होने वाली ईंटें बिजली भी बनाएंगी। दरअसल कनाडा की सोलर टेक्नोलॉजी कंपनी Mitrex ने सोलर ब्रिक नाम से बेहद खास तकनीक ईजाद की है। सोलर ब्रिक यानी कि ऐसी ईंट जो सूरज की रोशनी से बिजली बना सके। इस तकनीक की मदद से आपके घर की बाहरी दीवरों को पावर प्लांट में बदल सकते हैं।

इस तकनीक की खासियत है कि यह सिर्फ नए बन रहे घरों के साथ ही काम नहीं आती बल्कि पुराने या पहले से तैयार घरों की दीवारों को भी बिजली बनाने वाली दीवारों को बदल सकती है। इसके अलावा किसी आम सोलर पैनल की तरह इसमें दीवारों की सुंदरता भी नहीं बिगड़ती।

सोलर ब्रिक यानी कि सूरज की रोशनी से बिजली बनाने वाली ईंट, एक बिल्डिंग-इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक तकनीक है। इसे BIPV भी कहा जाता है। इसे इमारतों की बाहरी दीवार पर लगाया जाता है। दिखने में यह साधारण ईंटों की जैसी ही लगती हैं लेकिन इनमें सोलर सेल लगे होते हैं।

इस तकनीक की खासियत है कि हर एक ईंट 330W तक बिजली बना सकती है। इसी वजह से लोगों के घर या इमारतें अपने आप में पावर प्लांट बन सकते हैं।
इस होम कंस्ट्रक्शन तकनीक की खासियत है कि इसका इस्तेमाल नई बन रही इमारतों के साथ-साथ पुराने घरों या बिल्डिंगों के साथ भी किया जा सकता है। इन्हें पुराने घरों या इमारतों की दीवारों पर री-क्लैडिंग या ओवर-क्लैडिंग के जरिए इंस्टॉल किया जा सकता है।

इनकी वेबसाइट के अनुसार हाल ही में एक 4,000 वर्ग फुट क्षेत्र में 59kW क्षमता वाले प्रोजेक्ट में इसका इस्तेमाल किया गया है। इस प्रोजेक्ट में पुरानी बिल्डिंग के डिजाइन में कोई बदलाव किए बिना ही इसे बिजली बनाने वाले पावर प्लांट में बदल दिया गया।
मिट्रेक्स की सोलर ब्रिक में एडवांस्ड पेटेंट कोटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। यह इन पर पड़ने वाली धूप को बहुत ज्यादा चमकने नहीं देती। इसे आप एंटी रिफ्लेक्टिंग मान सकते हैं।

इस पर धूल, मिट्टी और गंदगी आसानी से नहीं जमती, इसकी वजह से इनकी मेंटेनेंस काफी आसान हो जाती है। ऐसे में इसे घरों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मजबूत मटेरियल माना जाता है, जो कि काफी टिकाऊ साबित होता है।

सोलर ब्रिक को कंस्ट्रक्शन और आर्किटेक्चर की जरूरतों के मुताबिक काफी फ्लेक्सिबल बनाया गया है। इसमें कस्माइजेबल फेसिंग लेयर्स, अलग-अलग साइज के पैनल और बैकिंग ऑप्शन मिलते हैं। इसकी वजह से इमारते बनाने वाले बिल्डर्स इसे अपनी जरूरत के अनुसार इसे कस्टमाइज कर सकते हैं।
इन सोलर ब्रिक को किस क्षमता में इस्तेमाल किया जाता है इसके आधार पर घर के तमाम छोटे और बड़े अप्लायंस जैसे कि फ्रिज और एसी इनकी बिजली से चलाए जा सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार क्योंकि इनका एक पैनल 330W का है, तो ऐसे 10-12 पैनल लगाने पर लगभग 3.3kW से 4kW का सेटअप तैयार हो सकता है। यह दिनभर पूरे घर का लोड आसानी से चला सकते हैंं।

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