छत ही नहीं अब खिड़कियों से भी बनेगी बिजली, ईजाद हुआ ऐसा सोलर पैनल 

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बिजली की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ रही हैं और बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए लोग सोलर पैनल का सहारा ले रहे हैं। बिजली की समस्या से निपटने के लिए लोग छत पर सोलर पैनल लगाने के बारे में सोचते हैं। हालांकि, हर कोई अपनी छत पर सोलर पैनल नहीं लगवाना चाहता है। क्योंकि, उसके लिए छत पर ज्यादा जगह चाहिए होती है। लेकिन अब लोगों की यह समस्या दूर हो सकती है। हाल ही में हुई एक नई स्टडी से पता चला है कि भविष्य में इस तरह सोलर पैनल लगाने की जरूरत खत्म हो सकती है। क्योंकि लोगों के पास विंडो सोलर पैनल लगाने का ऑप्शन होगा। यह बाल से 10 हजार गुना पतला और पारदशी होगा।

इस साल मई में सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU सिंगापुर) के रिसर्चर्स ने बताया कि उन्होंने एक नए तरह का सोलर सेल बनाया है। जो एक बाल से भी 10,000 गुना पतला है। इतना पतला होने के कारण यह सोलर पैनल ट्रांसपेरेंट है। ताकि खिड़की के पार आसान से देखा जा सके। इस नए प्रकार के सोलर पैनल को पेरोव्स्काइट नाम के क्रिस्टलाइन स्ट्रक्चर वाले मटीरियल से बनाया गया है। यह सोलर पावर को बिजली में बदलता है।
पुराने पेरोव्स्काइट सोलर सेल और बाजार में मिलने वाले आम सोलर पैनल भले ही ज्यादा बिजली बनाते हों, लेकिन NTU के नए सोलर पैनल जितने भी कम बिजली बनाते हैं, उसकी भरपाई अपनी खास खूबियों और आसान इस्तेमाल से कर देते हैं।

ACS एनर्जी लेटर्स में छपे रिसर्च पेपर के अनुसार, नए पेरोव्स्काइट पैनल इतने पारदर्शी हैं कि आप उन्हें खिड़कियों पर लगा सकते हैं और इससे बाहर का नजारा देखने में कोई खास दिक्कत नहीं होगी।
ये सोलर पैनल खिड़की के कांच की धुंधलाहट थोड़ी बढ़ा देते हैं, जिससे अंदर आने वाली रोशनी 70-80% से घटकर 41% रह जाती है। सुनने में यह कटौती बहुत ज्यादा लगती है, लेकिन असल में कमरे में काफी रोशनी बनी रहती है। क्योंकि धूप का चश्मा तो रोशनी को इससे भी कहीं ज्यादा 8% से 18% तक घटा देता है, फिर भी हमें सब साफ दिखता है।

ये नए सोलर पैनल कारों और पहनने लायक गैजेट्स में भी लगाने के लिए बहुत अच्छे हैं। सोचिए, आप अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ी चला रहे हैं और साथ ही वह सोलर पैनल से चार्ज भी हो रही है। पारदर्शी पैनल शायद इतनी ऊर्जा ना दे पाएं कि गाड़ी हमेशा चलती रहे, लेकिन इससे आपके बिजली के बिल में अच्छी-खासी कमी आ सकती है।

सिलिकॉन से बने ट्रेडिशनल सोलर पैनल से अलग NTU सिंगापुर के पेरोव्स्काइट पैनल इनडायरेक्ट आ रही या बिखरी हुई सूरज की रोशनी से भी बिजली बना सकते हैं। यह उन शहरों के लिए बहुत फायदेमंद है, जहां सीधी धूप कम ही मिल पाती है। इसके अलावा, इस स्टडी की लीडर एनालिसा ब्रूनो का कहना है कि NTU सिंगापुर के पेरोव्स्काइट सेल असल में रोशनी की कुछ खास वेवलेंथ को अलग कर सकते हैं। वे इंजीनियरों की जरूरत वाली रोशनी को सोख लेते हैं और बाकी को वैसे ही छोड़ देते हैं। साथ ही, इन पैनल को बनाना आसान होना चाहिए, हालांकि ट्रांसपेरेंसी को कंट्रोल करने के लिए इनमें एक खास थर्मल इवेपोरेशन प्रोसेस की जरूरत होती है। जिसमें मटीरियल को वैक्यूम चैंबर में तब तक गर्म किया जाता है जब तक वे भाप बनकर पतली परत ना बना लें।

हालांकि, पेरोव्स्काइट सोलर पैनल अभी डेवलपमेंट के शुरुआती दौर में हैं, लेकिन इसमें शामिल वैज्ञानिकों को भरोसा है कि अगर इन्हें कांच के सामने वाले ऑफिस टावरों की खिड़कियों पर लगाया जाए, तो ये सोलर पैनल हर साल सैकड़ों मेगावाट प्रति घंटे बिजली बना सकते हैं। ब्रूनो ने पेरोव्स्काइट सोलर पैनल के लिए पहले ही पेटेंट फाइल कर दिया है और अगर दूसरी कंपनियां सोलर पैनल बनाने की खास प्रोसेस को सही साबित कर पाती हैं, तो हो सकता है कि जल्द ही ये घरों में लगें दिखें।

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