नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 9 वीं बार ली सीएम की शपथ,सम्राट और विजय बने डिप्टी सीएम

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बिहार में नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड नौवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। पटना स्थित राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नीतीश कुमार के साथ बीजेपी के दो उपमुख्यमंत्री ने भी इस अवसर पर शपथ ली।इसमें सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा शामिल है। पटना स्थित राज भवन में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जय श्री राम के नारे भी सुनाई दिए। रविवार को नीतीश कुमार के साथ आठ अन्य नेताओं ने भी मंत्रीपद की शपथ ली। इनमें जेडीयू और बीजेपी से तीन-तीन, हम से एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल है।इस अवसर पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी वहां मौजूद रहे।

प्रधान मंत्री ने दी बधाई

नीतीश कुमार के एक बार फिर से आरजेडी ,कांग्रेस और वाम दलों से नाता तोड़कर एनडीए खेमे मे आने और इसके बाद रविवार को मुख्यमंत्री पद की 9 वीं बार शपथ लेने पर प्रधानमंत्री ने बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार की 9 वीं मुख्यमंत्रित्व काल में उपमुख्यमंत्री बने बीजेपी के नेताद्वय सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को मंत्री पद पाने के लिए बधाई देते हुए नीतीश कुमार को इसके साथ टैग किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में तेजी से विकास होगा।

नीतीश पर गरजने वाले बने उनके उप

नीतीश कुमार की एक बार फिर से पलट कर एनडीए खेमे में आने के बाद मुख्य रूप से कोई परिवर्तन नहीं हुआ,क्योंकि मुख्यमंत्री पहले भी नीतीश कुमार थे और अभी भी नीतीश कुमार ही अगले बड़े कदम तक यही मुख्यमंत्री रहेंगे। हां! इसमें एक बड़ा बदलाव आया है, वह यह कि अब तक जो इनके सहयोगी थे, वह विपक्ष में चले गए और जो विपक्ष में थे वे इनके पक्ष में आ गए। यहां तक की बात-बात में नीतीश कुमार को कोसने वाले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और विधानसभा में नेता विपक्ष विजय सिन्हा अब उनके ही उप यानि उपमुख्यमंत्री बन गए हैं। अब ये नीतीश कुमार की खामियां निकालने की जगह उनका गुणगान करते नजर आएंगे।

नीतीश खेमा और एनडीए खेमा का है अलग -अलग स्वार्थ

महागठबंधन से अलग होकर एनडीए गठबंधन में आकर नए रूप से नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने को लेकर नीतीश कुमार की जेडीयू और बीजेपी दोनों अपने-अपने एजेंडा को साधने का प्रयास कर रही है। जेडीयू के लिए तेजस्वी के हाथों में जाती हुई नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री की कुर्सी को बजाना जरूरी था ,तो वही बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए का मुख्य मुद्दा लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीट जीतने का है। ऐसे में नीतीश कुमार के वर्तमान मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार में अभी जिन मंत्रियों ने शपथ ली है ,उसमें मंत्रियों की जाति पर विशेष ध्यान दिया गया है,क्योंकि बिहार के चुनाव में जाति जीत दिलाने वाली एक महत्वपूर्ण कारक होती है।

नीतीश कुमार की सरकार की जातिगत समीकरण

* दो कुर्मी (नीतीश कुमार और श्रवण कुमार)- जेडीयू

* दो भूमिहार (विजय सिन्हा और विजय चौधरी) – बीजेपी और जेडीयू

* एक कुशवाहा (सम्राट चौधरी)- बीजेपी * एक राजपूत (सुमित कुमार सिंह )- निर्दलीय

* एक यादव (विजेंद्र प्रसाद यादव) – जदयू

*एक दलित (संतोष कुमार सुमन)- हम

* एक अति पिछड़ा (डॉ प्रेम कुमार )- बीजेपी

40 लोकसभा सीट जीतने की उम्मीद

नीतीश कुमार के रविवार को फिर से मुख्यमंत्री बनने से लेकर बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए कुंनबा काफी गदगद नजर आ रहा है। बीजेपी के तमाम बड़े नेता अब यह कहने लगे हैं की 2019 के चुनाव में एनडीए गठबंधन को बिहार की 40 में से 39 सीट आई थी, लेकिन इस बार वे सभी 40 की 40 सीट जीतकर आरजेडी,कांग्रेस,और वाम दलों को शून्य पर आउट कर देंगे।

चिराग ने बिहार फर्स्ट ,बिहारी फर्स्ट को तरजीह देने की बात की

नीतीश कुमार के एनडीए खेमे में आने और फिर से एनडीए के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें शपथ दिलाने के बाद एनडीए के वर्तमान स्वरूप में कोई परिवर्तन ना हो जाए इसे देखते हुए बीजेपी चिराग पासवान को खास तवज्जो दे रही है। क्योंकि ऐसा होने पर विपक्षी दल एनडीए पर बिखराव की बात करेंगे।एनडीए खेमे में आने से पहले गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चिराग पासवान के साथ बातचीत की और आज मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में जेपी नड्डा अपने साथ ही चिराग पासवान को लेकर शपथ ग्रहण समारोह स्थल तक ले गए। हालांकि चिराग पासवान ने अभी भी कहा कि नीतीश कुमार के साथ उनका विरोध नीतिगत था और ऐसी परिस्थितियों में सुधार नहीं आई तो उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा।साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस बात के लिए भी जोर डालेंगे की नई सरकार की नीतियों में बिहार फर्स्ट बिहार फर्स्ट को स्थान दिया जाए।

नौकरियां और काम को लेकर नीतीश और तेजस्वी में वाद प्रतिवाद

महागठबंधन से नाता तोड़ 9 वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को लेकर एक तरफ जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वह तेजी से काम करना चाह रहे थे, जिसमें आरजेडी बाधक बन रही थी। उदाहरण के रूप उन्होंने राज्य में बड़े पैमाने पर हुई शिक्षकों की नियुक्ति का हवाला दिया।

वही इस मामले पर पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि लालू प्रसाद की तो अब उम्र ज्यादा हो गई है,अब उनसे कोई काम नहीं हो रहा था तो हमने तेजी से उनसे काम करवाया।पिछले 17 महीने में जितनी जितने काम हुए उतने 17 वर्षों में कभी नहीं हुए। उदाहरण के तौर पर उन्होंने भी शिक्षकों की नियुक्ति और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की बात की।

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