क्या राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश पर जदयू करेगी करवाई ?जदयू ने कहा हरिवंश ने पद के लिए अपनी बौद्धिकता बेच दी !

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अखिलेश अखिल
हरिवंश ! अब यह नाम है उनका। मौजूदा समय में राज्य सभा में उप सभापति हैं। जदयू जब बीजेपी के साथ थी तब नीतीश कुमार ने हरिवंश को राज्य सभा में भेजा। जदयू और बीजेपी की दोस्ती बरकरार रहे इसे देखते हुए बीजेपी ने हरिवंश को उपसभापति बनाया। उनकी बौद्धिकता को देखा गया था। एक जमाने में चर्चित सम्पादकों में शुमार रहे हरिवंश। बलिया से चलकर रांची में सेट हुए और प्रभात खबर को स्थापित किया। जब तक प्रभात खबर के सम्पादक रहे ,विपक्ष की आवाज बने रहे। कई बेहतरीन सम्पादकीय से उन्होंने देश को चौंकाया था। उनके नेतृत्व में काम करने वाला पत्रकार भी पत्रकारिता ही करते रहे। दलाल नहीं बन सके। तब गोदी मीडिया का प्रभाव न था। लेकिन जैसे ही सब कुछ बदलने लगा,पत्रकारिता ख़त्म होने लगी हरिवंश को नेता बनने की चाहत हुई। समाजवादी तो थे ही। पहुँचने लगे नीतीश के दरबार में। नीतीश कुमार ने उन्हें राज्य सभा में भेज दिया। सोच यही थी पार्टी के अनुकूल वहां काम करेंगे। हरिवंश को राज्य सभा में दो बार उपसभापति बनने का मौका मिला। इधर जदयू ,बीजेपी से अलग हो गई लेकिन हरिवंश सत्ता के साथ बने रहे।

हरिवंश को पता है कि जिस दल ने उन्हें यहाँ तक पहुँचाया है वह अब मोदी सरकार के खिलाफ लड़ रहा है। विपक्षी दलों ने संसद उद्घाटन का बहिष्कार किया है। बहिष्कार करने वाली पार्टी में जदयू भी शामिल है। लेकन हरिवंश को इससे क्या मतलब ? हरिवंश की नीतीश कुमार से अब बात भी होती है या नहीं यह किसी को पता नहीं है। वे खुद भी जदयू में हैं या कहीं और यह भी किसी को पता नहीं।

संसद उद्घाटन समारोह में हरिवंश दिखे। बड़े खुश थे। उन्होंने स्वागत भाषण भी दिया। हरिवंश ने नए संसद भवन के उद्घाटन को ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि यह इमारत केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारत के लोगों की उम्मीदों एवं आकांक्षाओं को पूरा करने का जरिया है। हरिवंश ने नए संसद भवन को ‘भारतीय लोकतंत्र का श्रद्धा स्थल’ बताते हुए वहां मौजूद लोगों का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि नए भवन में कई अहम फैसले किए जाएंगे।

उन्होंने स्वागत संबोधन में कहा,यह इमारत ‘वास्तुकला’ का सटीक उदाहरण है, जिसमें सांस्कृतिक विरासत और विविधता की झलक दिखती है। यह संसद की आवश्यकताओं के अनुसार सुंदरता एवं प्रौद्योगिकी का भी मिश्रण है।’ हरिवंश ने कहा कि नई इमारत में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के लिए बैठने का अपेक्षाकृत अधिक स्थान है, एक एकीकृत मल्टी-मीडिया प्रदर्शन सुविधा है और सुरक्षित मतदान के लिए सुविधाएं हैं।

उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र की गौरवशाली यात्रा में आज का दिन मील का पत्थर है। अगले 25 साल में जब हम अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएंगे तो यह नया संसद भवन अमृत काल में जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा स्रोत साबित होगा।’ हरिवंश ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि हमारी संसद हमारे देश के सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए कई फैसले लेगी..वह दिन दूर नहीं जब भारत लोकतांत्रिक देशों में शीर्ष पर होगा और पूरी दुनिया का नेतृत्व करेगा।’

लेकिन उनसे कौन पूछेगा कि क्या कोई भवन बदल जाने से लोकतंत्र की गरिमा बढ़ जाएगी ? जिस संसद भवन में वे सालों से बैठते आ रहे हैं और पक्ष -विपक्ष के बीच जो खेल हो रहे हैं उसके बारे में उनकी धारणा क्या है ये तो वही जानेंगे। इससे ज्यादा उनसे कुछ पूछा भी नहीं जा सकता।

लेकिन अब जदयू उन पर काफी खफा है। राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश के नई संसद भवन के उद्धाटन समारोह में शामिल होने पर उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड बेहद नाराज है। माना जा रहा है कि जेडीयू हरिवशं के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने सोमवार को कहा, ‘कहां थे कहां पहुंच गए। पत्रकारिता जगत के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर। जेडीयू ने उच्च सदन में भेजा। लोकतंत्र कलंकित हो रहा था। हमारे पुरखो के इतिहास को हटाने की तैयारी थी।

नीरज कुमार ने आगे कहा कि आपके सभापति महामहिम उपराष्ट्रपति को भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाता है, आपने अपने पद के लिए बौद्धिकता की जमीन बेच दी। आने वाला जेनरेशन बौद्धिकता के उस अनुकरणीय व्यक्तितव के प्रति कैसा भाव रखेगी कि जब पार्टी ने तय कर दिया, नेतृत्व ने तय कर दिया। आपके सभापति कार्यक्रम में नहीं जा रहे हैं। जब लोकतंत्र का काला अध्याय लिखा जा रहा था तब आपने उसकी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दी। यह चिंता और चिंतन का विषय है। पार्टी नेतृत्व इसपर क्या कार्रवाई करेगी यह उनके अधिकार क्षेत्र में है। लेकिन राजनीति में आपने जो गुनाह किया है यह आने वाले जेनरेशन के मन में कसक हमेशा रहेगी। इसपर चिंता और चिंतन दोनों होगा।

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