दुर्गा पूजा से ठीक पहले बंगाल की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है।टीएमसी से अलग हुए कूचबिहार के बागी सांसद जगदीश बसुनिया ने दावा किया है कि एनसीपीआई में शामिल हुए TMC के 20 बागी सांसदों में से 17 दुर्गा पूजा से पहले या बाद में बीजेपी में शामिल हो जाएंगे। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उनके इस दावे से बागी गुट में ही फूट पड़ गई है. साथी सांसदों ने इस बात को सिरे से नकार दिया है, वहीं, बीजेपी ने भी साफ कह दिया है कि वह ऐसे किसी नेता को पार्टी में शामिल नहीं करने जा रही है।
जगदीश बसुनिया ने टीएमसी की करारी हार के बाद ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत की थी और बाद में एनसीपी में शामिल हो गए थे। उनका दावा है कि 17 सांसदों ने मिलकर बीजेपी में जाने का फैसला कर लिया है। उनका तर्क है कि 20 सांसदों के समूह में से 17 का एक साथ पाला बदलना दो-तिहाई से अधिक संख्या बैठता है, जिससे उन पर दलबदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) लागू नहीं होगा।
दरअसल, मई 2026 में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी के 27 में से 20 सांसदों ने बगावत करते हुए NCPI का दामन थाम लिया था और एनडीए (NDA) को समर्थन देने का ऐलान किया था।
बसुनिया के इस बयान पर उनके ही साथी बागी सांसदों ने खुला विरोध दर्ज कराया है।शताब्दी रॉय ने स्पष्ट किया कि बसुनिया ने यह बात अपनी निजी हैसियत से कही है और सांसदों के समूह ने ऐसा कोई साझा फैसला नहीं लिया है।वहीं, मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहिर खान ने सख्त लहजे में कहा कि बसुनिया को सभी सांसदों की तरफ से बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
अबू ताहिर ने उन दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि वह, जंगीपुर सांसद खलीलुर रहमान और बहरामपुर सांसद यूसुफ पठान बाहर से एनडीए का समर्थन करेंगे।उन्होंने दो-टूक कहा कि हम न तो बीजेपी में जा रहे हैं और न ही एनडीए में।
इस पूरे घटनाक्रम पर बंगाल बीजेपी ने भी सख्त रुख अपनाया है।प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बसुनिया के दावों पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या वह मंगल ग्रह की बीजेपी की बात कर रहे हैं? भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी में कोई भी सिर्फ इसलिए शामिल नहीं हो सकता, क्योंकि वह आना चाहता है। उन्होंने दो-टूक कहा कि टीएमसी या एनसीपीआई से किसी को भी बीजेपी में शामिल करने की कोई योजना नहीं है और बंगाल की जनता टीएमसी शासन के दौरान हुए अत्याचारों को नहीं भूली है।
टीएमसी के 20 बागी सांसदों का भविष्य फिलहाल अधर में लटका है, क्योंकि संसद के रिकॉर्ड में वे अभी भी टीएमसी के ही सांसद हैं।ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से इन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की है और मामले के जल्द निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे हैं।वहीं, लोकसभा सचिवालय के नोटिस पर जवाब देने के लिए स्पीकर ने इन बागी सांसदों को 22 सितंबर तक का समय दिया है।

