प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को दिया नए संसद भवन का तोहफा, जाने क्यों जरूरत पड़ी इस नए संसद भवन की और क्या है इसकी खासियत

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बीरेंद्र कुमार झा

मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नए संसद भवन का उद्घाटन कर पूरे देश को एक बड़ी सौगात दी है। इस उद्घाटन समारोह की शुरुआत पूजा-अर्चना और सर्व धर्म प्रार्थना के साथ की गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक सेंगोल को संसद भवन में निर्धारित जगह पर स्थापित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धार्मिक अनुष्ठान और पूजा के बाद नए संसद भवन में सेंगोल को स्थापित कर दिया है। संसद भवन में सैंगोल की स्थापना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के विभिन्न संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन के निर्माण में लगे श्रमजीवियों का अभिनंदन किया। गौरतलब है कि 18 मठों के मठाधीशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आशीर्वाद देते हुए यह राजगंज सौंपा है।सनातन धर्म की परंपरा में राजदंड सदियों से शासन का प्रतीक रहा है और इसका अर्थ है आप किसी के साथ अन्याय नही कर सकते हैं।

क्यों पड़ी नए संसद भवन की जरूरत

संसद का वर्तमान भवन 1927 में बनकर तैयार हुआ था, जो अब लगभग 100 साल पुराना होने जा रहा है। इसके दोनों सदनों में सांसदों के बैठने की सुविधाजनक व्यवस्था का भी अभाव था। 1971 की जनगणना के आधार पर की गई परिसीमन पर आधारित लोकसभा सीटों की संख्या 545 में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है,लेकिन 2026 के बाद इसमें काफी वृद्धि होने की संभावना है। ऐसे में नए सांसदों के लिए बैठने की जगह पर पुराने संसद भवन में नहीं होती।

प्राकृतिक रोशनी हो गई थी कम

पुरानी संसद भवन की जाली की खिड़कियों को कवर करने से संसद के दोनों सदनों के कक्ष में प्राकृतिक रोशनी कम हो गई थी। इस भवन को आधुनिक अग्नि मानदंडों के अनुरूप भी डिजाइन नहीं किया गया था, साथ ही इस में आपातकालीन स्थिति में निकासी की व्यवस्था अत्यंत अपर्याप्त और असुरक्षित थी। इस को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों ने 5 अगस्त 2019 को सरकार से संसद के नए भवन के निर्माण के लिए आग्रह किया था। इसके बाद 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन का शिलान्यास किया था।

नए संसद भवन की खासियत

पुराना संसद का आकार गोल है जबकि नए संसद भवन को तिकोने आकार में डिजाइन किया गया है। त्रिकोण का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है, साथ ही विज्ञान के अनुसार या सबसे स्थाई संरचना होती है। पुराने संसद में लोकसभा में 590 और राज्यसभा में 280 लोगों की सीटिंग कैपेसिटी है, जबकि इस नए संसद भवन की लोकसभा में 888 सीटें हैं और उसके विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्यादा लोगों के बैठने का इंतजाम है,वहीं इसके राज्यसभा में 384 सीटें हैं और इसके विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्यादा लोगों के बैठने की क्षमता है। दोनों सदनों की जॉइंट सेशन के वक्त लोकसभा में 1272 से ज्यादा सांसद एक साथ बैठ सकते हैं।

अलग बनाए गए हैं ऑफिस

नए संसद भवन में आम कामकाज के लिए अलग ऑफिस बनाए गए हैं, जो हाईटेक सुविधाओं से लैस हैं। कैफे डायनिंग एरिया, कमिटी मीटिंग के लिए तमाम कमरों में ही हाईटेक इक्विपमेंट लगाए गए हैं।साथ ही यहां कॉमन रूम, महिलाओं के लिए लाउंज और वीआईपी लाउंज की भी व्यवस्था है।

संविधान हाल

नए संसद में संविधान हाल भवन के बीचो बीच बना हुआ है। इसके ऊपर अशोक स्तंभ लगा है। इस हाल में संविधान की कॉपी रखी जाएगी ,साथ ही महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और देश के प्रधानमंत्रियों की बड़ी तस्वीर भी लगाई जाएगी।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का है हिस्सा

संसद के नवनिर्मित भवन को गुणवत्ता के साथ रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है नया संसद केंद्र सरकार के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है।इसका निर्माण 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था।इसे बनाने का टेंडर टाटा प्रोजेक्ट को साल 2020 के सितंबर में दिया गया था। नए संसद भवन के आर्किटेक्ट विमल पटेल हैं।नया संसद भवन पूरी तरह से भूकंप रोधी है।

निर्माण के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से मंगाई गई थी सामग्री

नई संसद भवन के निर्माण के लिए बलुआ पत्थर राजस्थान के सरमथुरा से, सागौन (Teak wood) की लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से मंगाई गई है। कारपेट उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से मंगवाया गया है। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से बांस की लकड़ी की फ्लोरिंग मंगवाई गई है। स्टोन जाली वर्क राजस्थान के राजनगर और उत्तर प्रदेश के नोएडा से लिए गए हैं।अशोक प्रतीक को महाराष्ट्र के औरंगाबाद राजस्थान के जयपुर से मंगवाया गया है। अशोक चक्र को मध्यप्रदेश के इंदौर से लिया गया है। लाल-लाख राजस्थान के जैसलमेर से मंगवाया गया है। राजस्थान के अंबाजी से सफेद संगमरमर पत्थर खरीदे गए हैं। केसरिया ग्रीनस्टोन उदयपुर से मंगवाया गया है। एम सेंड को हरियाणा के चकरी दादरी से,फ्लाई एस ब्रिक्स को एनसीआर हरियाणा और उत्तर प्रदेश से खरीदा गया था । ब्रास वर्क और प्रीकास्ट ट्रेच गुजरात के अहमदाबाद से लिए गए। एल एस/आर एस फाल्स सीलिंग दमन और दीव ली गई है।

 

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