न्यूज़ डेस्क
पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में 27 फरवरी को चुनाव है। नामांकन की तारीख कल ख़त्म हो गई और अब दस तारीख तक नाम वापसी की अंतिम समय सीमा निर्धारित हैं। लेकिन मजे की बात है इस बार चुनाव मैदान में कुल 225 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है। 60 सीटों के लिए 225 उम्मीदवार यानी हर सीट के लिए चार उम्मीदवार।
इस बार के चुनाव में कई पार्टी चुनावी लड़ाई में शिरकत कर रही है। नागालैंड की स्थानीय पार्टियां तो मैदान में है ही बड़ी पार्टियों में कांग्रेस ,बीजेपी और टीएमसी भी मैदान में खड़ी है। इसके अलावा जदयू ,लोजपा के साथ ही आप जैसी पार्टी भी मजबूती से चुनाव मैदान में है। सबके जीत के दावे भी है। मजे की बात है कि मौजूदा समय में अभी विधान सभा विपक्ष विहीन है। पिछले चुनाव में विपक्ष के पास अच्छी सीटें थी लेकिन बाद में सारे विपक्ष सत्ता के साथ चले गए। पूर्वोत्तर में अकसर इस तरह की घटनाएं होती रहती है। यहाँ अधिकतर विधायक सत्ता के साथ रहने के आदि हैं।
मौजूदा समय में नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री हैं और वे नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के नेता भी हैं। रियो राजधानी कोहिमा के उतरी आगामी से चुनाव लड़ रहे हैं। नागालैंड के उपमुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता यंथुंगो पैटन ने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। वे तुई विधान सभा सभा से चुनाव लड़ेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री एनडीपीपी उम्मीदवार टी आर जेलियांग पेरेन विधान सभा से उम्मीदवार बने हैं। जबकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष तेमजेन अलांग एलोंतक सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
अभी जो हालत है उसमे उसमे मौजूदा सरकार काफी मजबूत स्थिति में दिख रही है। विपक्ष के नहीं होने की वजह से संयुक्त जनतांत्रिक गठबंधन चुनाव प्रचार में आगे है और उसके उम्मीदवारों के प्रति जनता में रुझान भी है। मौजूदा सत्ता वाले गठबंधन में एनडीडीपी ,बीजेपी और नागा पीपुल्स फ्रंट शामिल है। यह बात और है कि एनडीपीपी और बीजेपी गठबंधन 2018 के चुनाव से पहले ही बन गया था। इसके अलावा एनपीएफ के 21 विधायक भी सत्ता पक्ष वाले गठबंधन में शामी हो गए। इसके साथ ही विपक्ष ख़त्म हो गया। यह भी एक अजीब कहानी है। बता दें कि पिछले 2018 के चुनाव में एनपीएफ को 26 सीटें मिली थी जबकि एनडीडीपी को 16 सीटें और बीजेपी को 12 सीटें हाथ लगी थी। एनपीपी को दो सीट और जदयू को एक सीट मिली थी। नागालैंड के कई इलाको में जदयू की पहचान है और इस बार भी जदयू मजबूती से मैदान में है। लेकिन इस चुनाव में आप ,लोजपा और टीएमसी जैसी पार्टी भी मैदान में है और कांग्रेस भी मजबूती से चुनाव लड़ रही है। देखना होगा कि इस चुनाव में बीजेपी चुनाव जीत पाती है या नहीं क्योंकि बड़ी संख्या में उम्मीदवार पाला बदलकर मैदान में उतरे हैं।
नागालैंड चुनाव में इस बार एक बड़ा मुद्दा यह भी है कि सात जनजातियां राज्य के 16 जिलों को काटकर एक अलग राज्य सीमांत नागालैंड की मांग कर रही हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में इस मसले का कोई हल निकालने के लिए एक बैठक की थी।

