क्या मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में BJP पर मंडरा रहा है हार का खतरा, चुनाव के तीन महीने पहले ही बुला लिया केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक

0
744

 विकास कुमार
लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,राजस्थान,तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होना है। हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में मिली करारी हार के बाद बीजेपी आलाकमान पहले से अलर्ट हो गया है। कहीं ना कहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को हार का डर सता रहा है। मध्य प्रदेश में एंटी इनकंबैंसी की लहर चल रही है। वहीं छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस बेहद मजबूत स्थिति में है, इसलिए बीजेपी आलाकमान ने विधानसभा चुनाव के तीन महीने पहले केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह और अमित शाह सहित अन्य सीईसी सदस्य उपस्थित थे। साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह भी बैठक में शामिल थे।

वहीं हार का खतरा भांपकर बीजेपी आलाकमान ने एबीसीडी नाम की रणनीति तैयार की है। बीजेपी ने विधानसभा सीटों को 4 श्रेणियों में बांटा है। एबीसीडी की रणनीति में सीटों को चार श्रेणियों में बांटा गया है।

ए श्रेणी में उन सीटों को रखा गया है जहां बीजेपी को जीत मिली है। वहीं बी श्रेणी में वैसी सीटों को रखा गया है जहां एक या दो बार हार मिली हो। सी श्रेणी में उन सीटों को रखा गया है जहां बीजेपी को लगातार दो बार हार मिली हो। डी श्रेणी में उन सीटों को रखा गया है जहां बीजेपी को कभी जीत नहीं मिली है। इस बंटवारे से कमजोर सीटों पर बीजेपी ज्यादा फोकस कर सकेगी। भाजपा विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की आधी सीटों पर नए उम्मीदवारों को मौका दे सकती है। इस बार भाजपा जातियों को पूरी तरजीह दे रही है,प्रत्याशी चयन में जातीय समीकरण का ख्याल रखा जाएगा।

इस बैठक में तय हुआ है कि मध्य प्रदेश में पार्टी नेतृत्व जल्द से जल्द इन 40 से 50 सीटों पर दो से तीन नाम का पैनल बनाएगा। भाजपा इस बार सिंतबर में ही हारी सीटों के उम्मीदवार तय कर देगी, ताकि उन्हें चुनाव लड़ने के लिए वक्त मिले। कुछ और घोषणाएं करने के लिए प्रदेश नेतृत्व ने केंद्रीय संगठन से स्वीकृति मांगी है।

इस साल के अंत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव होने हैं। भाजपा इनमें से सिर्फ मध्य प्रदेश में ही सत्ता में है। मध्य प्रदेश में सीएम शिवराज के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाएगा। बैठक में यह तय हुआ कि 20 अगस्त को शिवराज सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड जारी करेगी। हालांकि शिवराज सिंह चौहान का फिर से सत्ता में आना इतना आसान नहीं है क्योंकि बेरोजगारी,महंगाई,भ्रष्टाचार और हॉर्स ट्रेडिंग जैसी समस्या से मामा शिवराज घिरे हुए हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव पहले से बीजेपी के सामने बड़ी कठिन चुनौती है,देखना है कि मोदी और शाह की जोड़ी इस कठिन चुनौती से कैसे पार पाएंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here