प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जिसे छूना किसी भी नेता के लिए एक ख्वाब जैसा होगा है।आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर रहने वाले पंडित जवाहरलाल के रिकॉर्ड को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तोड़ दिया है।
26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की कुर्सी पर विराजमान हुए और लगातार अपने कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे कर लिए हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू 1952 के बाद चुनी गई सरकार के तौर पर 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।इस तरह नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे कार्यकाल तक पीएम रहने वाले नेता बन गए हैं।
पंडित जवाहर लाल नेहरू ने प्रधानमंत्री के तौर पर आजादी के बाद बिखरे हुए भारत को संस्थागत रूप दिया और राष्ट्र निर्माण का बीड़ा उठाया था , जिसे नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़ाते हुए विकसित भारत बनाने की आधार शिला रखी और 21वीं सदी के भारत को एक शक्ति के रूप में वैश्विक पटल पर खड़ा कर दिया है।देश और दुनिया के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब आगे क्या?
प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 12 साल का सफर पूरा कर लिया है।देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने आजाद भारत में संविधान लागू होने के बाद 13 मई 1952 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद नेहरू लगातार 4397 दिन यानी 12 साल 14 दिन तक प्रधानमंत्री रहे थे। पीएम मोदी ने 9 जून को सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री का नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 4398 दिन यानी 12 साल 15 दिन पूरे कर लिए हैं। पीएम मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार देश के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. इसके बाद 9 जून 2024 को ही उन्होंने एनडीए के तीसरे कार्यकाल में पीएम पद की शपथ ली थी और उनके सत्ता में सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री और उनके सत्ता में सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं.
हालांकि, नेहरू 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन 1952 में लोकसभा चुनाव के पहले तक वो पांच साल अंतरिम सरकार के प्रमुख थे।नेहरू 1947 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री पद पर रहे।ऐसे में पंडित जवाहर लाल नेहरू का पूरा कार्यकाल तो 6130 दिन होता है, लेकिन इसमें से करीब 5 साल वो अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर प्रधानमंत्री रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सियासी तौर पर बीजेपी को मजबूती मिली है, जिसका नतीजा है कि देश के डेढ़ दर्जन राज्यों में उसकी सरकार है। बंगाल से लेकर राजस्थान तक असम से लेकर गुजरात तक बीजेपी की सरकार है।नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना नरेंद्र मोदी की सियासी लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है। देश की सत्ता में लगातार तीन बार आना और टिके रहना मोदी ब्रांड की ताकत दिखाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है, लेकिन अब आगे बारी अग्निपरीक्षा की है।पीएम मोदी के सामने अब एजेंडा विकसित भारत बनाने के साथ-साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने का है। साल 2026 भारत के लिए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’का साल बन चुका है। मोदी मोदी सरकार का लक्ष्य अगले दो से तीन सालों में भारत की जीडीपी को उस मुकाम पर पहुंचाना है जहां हम जर्मनी और जापान को पछाड़कर अमेरिका और चीन के ठीक पीछे पीछे खड़े हों।
पीएम मोदी लक्ष्य दूरगामी है। अब उनका सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘विकसित भारत 2047’ का है।भारत को विकसित देश बनाने के लिए मोदी सरकार सेमीकंडक्टर हब, ग्रीन हाइड्रोजन, और डिजिटल गवर्नेंस पर रिकॉर्ड रफ्तार से काम चल रहा है। 2014 में देश में
देश में जहां चंद सौ स्टार्टअप थे, आज 2026 में उनकी संख्या 2.3 लाख को पार कर चुकी है। मोदी का अगला विजन भारत की ‘स्पेस इकोनॉमी’ को मौजूदा 9 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर कुछ सालों में 45 बिलियन डॉलर तक ले जाने की है, जिसमें प्राइवेट सेक्टर की बड़ी हिस्सेदारी होगी।
देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब भारत एक विकासशील देश नहीं, बल्कि एक विकसित राष्ट्र बनाने की है। इस दिशा में ही बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स, देशभर में एक्सप्रेसवे का जाल, आधुनिक रेलवे स्टेशन और दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को स्थापित किया जा रहा है।पीएम मोदी का विजन भारत के कोने-कोने को वैश्विक स्तर के इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने का है. इस तरह से भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की कवायद लगातार की जा रही है।
देश की 146 करोड़ से ज्यादा की आबादी में जो युवा ऊर्जा है, उसे स्किल्ड लेबर और ग्लोबल लीडर्स में बदलना मोदी के विजन का अहम हिस्सा है। पंडित नेहरू के दौर में भारत ने ‘गुटनिरपेक्षता’ की नीति अपनाई थी, लेकिन मोदी के दौर में भारत की विदेश नीति ‘सक्रिय भागीदारी’ और ‘विश्वबंधु’ की है।
पीएम मोदी का विजन भारत को ग्लोबल गवर्नेंस के रूप में स्थापित करने का है।भारत मौजूदा दौर में केवल वैश्विक मंचों पर मूकदर्शक नहीं रहता,बल्कि एजेंडा सेट
सेट करता है। चाहे वो रूस-यूक्रेन विवाद में शांति की अपील हो, ग्लोबल साउथ की आवाज बनना हो या फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करना।
भारतीय इतिहास की विकास यात्रा को यदि एक रूपक में देखना हो, तो कहा जा सकता है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने जिस भारत की मजबूत नींव रखी थी,आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस पर एक भव्य और आधुनिक इमारत का निर्माण कर रहे हैं। भले ही कालखंड अलग हैं, चुनौतियां अलग हैं, लेकिन दोनों का लक्ष्य एक ही है।
1947 में जब देश आजाद हुआ, तब भारत सुई तक नहीं बनाता था. विभाजन का दर्द, घोर गरीबी और अशिक्षा के बीच पंडित नेहरू के सामने शून्य से एक राष्ट्र का सृजन करने की चुनौती थी।नेहरू ने IIT, AIIMS, ISRO (तत्कालीन इनकोसपार), भाखड़ा नांगल बांध और भारी उद्योगों (PSUs) के रूप में ‘आधुनिक भारत’ को स्थापित किए।इस तरह से भारत को अपने पैरों पर खड़ा करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सींचने का था। समय बदला और 2014 के बाद देश की कमान नरेंद्र मोदी के हाथों में आई।
मोदी ने नेहरू की बनाई उसी बुनियादी ताकत को 21वीं सदी की आधुनिकता और रफ्तार से जोड़ दिया। मोदी का विजन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ का है, जहां नेहरू के दौर में एम्स और आईआईटी गिने-चुने थे, आज मोदी सरकार में उनकी संख्या दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है।
पीएम मोदी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं।गठबंधन सरकार की मजबूरियां, घरेलू मोर्चे पर रोजगार की मांग, और वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच भारत की रफ्तार को बनाए रखना पीएम मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।
नेहरू ने भारत की मजबूत नींव रखने का काम किया तो मोदी उस पर भव्य इमारत बना रहे हैं। नेहरू ने अगर भारत को संस्थागत रूप से ‘एक’ किया, तो मोदी उस पर भव्य इमारत बना रहे हैं। नेहरू ने अगर भारत को संस्थागत रूप से ‘एक’ किया, तो मोदी ने उसे ‘श्रेष्ठ’ और डिजिटल रूप से ‘अखंड’ बनाया है।अब देखना यह होगा कि ‘मिशन 2047’ के इस सफर में मोदी भारत को किस नई ऊंचाई पर ले जाते हैं।

