मनीष सिसोदिया ने तिहाड़ जेल से उठाया प्रधानमंत्री की डिग्री का मामला,देश के नाम लिखी चिट्ठी

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बीरेंद्र कुमार झा

दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में राष्ट्रीय राजधानी स्थित तिहाड़ जेल से दिल्ली के पूर्व शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने देश के नाम चिट्ठी लिखते हुए एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री का मुद्दा उठाया।उन्होंने देश के नाम अपनी चिट्ठी में लिखा है आज हम एक ही 21वीं सदी में जी रहे हैं। दुनिया भर में विज्ञान और टेक्नोलॉजी में हर रोज नई तरक्की हो रही है। सारी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात कर रही है। ऐसे में जब मैं प्रधानमंत्री जी को यह कहते हुए सुनता हूं कि गंदे नाले में पाइप डालकर उसकी गंदी गैस से चाय या खाना बनाया जा सकता है, तो मेरा दिल बैठ जाता है। उन्होंने लिखा कि क्या नाली की गंदी गैसों से खाना बनाया जा सकता है ? नहीं।

प्रधानमंत्री का बयान देश के लिए खतरनाक

मानुष सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में आगे लिखा है कि जब प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि बादलों के पीछे उड़ते जहाज को रडार नहीं पकड़ सकता है, तो पूरी दुनिया के लोगों में वह हास्य के पात्र बनते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चे उनका मजाक बनाते हैं। उनके इस तरह के बयान देश के लिए खतरनाक है हैं।

कम पढ़ा लिखा प्रधानमंत्री देश के लिए खतरनाक

मनीष सिसोदिया ने चिट्ठी में आगे लिखा कि प्रधानमंत्री के कम पढ़े लिखे होने के कई नुकसान हैं, जैसे पूरी दुनिया को पता चल जाता है कि भारत के प्रधानमंत्री कितने कम पढ़े लिखे हैं और उन्हें विज्ञान की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्ष जब प्रधानमंत्री जी से गले मिलते हैं, तो एक-एक झप्पी की भारी कीमत लेकर चले जाते हैं। बदले में ना जाने कितने कागजों पर साइन करवा लेते हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री जी तो कुछ समझ ही नहीं पाते हैं क्योंकि वह तो कम पढ़े लिखे हैं।

कम पढ़ा लिखा प्रधानमंत्री युवाओं के सपने को पूरा करेगा

मनीष सिसोदिया ने आगे लिखा कि आज देश का युवा एस्पिरेशनल है। वह कुछ करना चाहता है। वह अवसर की तलाश में है। वह दुनिया को जीतना चाहता है।साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कमाल करना चाहता है। क्या एक कम पढ़ा लिखा प्रधानमंत्री आज के युवाओं के सपनों को पूरा करने की क्षमता रखता है?

पूरे देश में 60 हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए

मनीष सिसोदिया ने कहा की हाल के वर्षों में देश भर में 60 हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। क्यों?एक तरफ देश की आबादी बढ़ रही है तो सरकारी स्कूलों की संख्या तो बढ़नी चाहिए थी। अगर सरकारी स्कूलों का स्तर अच्छा कर दिया जाता, तो लोग अपने बच्चों को प्राइवेट से निकालकर सरकारी स्कूलों में भेजना शुरु कर देते,जैसा कि अब दिल्ली में होने लगा है।लेकिन देश भर में सरकारी स्कूलों का बंद होना खतरे की घंटी है। इससे पता चलता है कि शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में है ही नहीं। अगर हम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं देंगे तो क्या भारत तरक्की कर सकता है?

देश के मैनेजर को पढ़ा लिखा नहीं होना चाहिए

मनीष सिसोदिया ने लिखा कि मैंने प्रधानमंत्री जी का एक वीडियो देखा था, जिसमें वे बड़े गर्व के साथ कह रहे हैं कि वे पढ़े-लिखे नहीं है। केवल गांव के स्कूल तक ही उनकी शिक्षा हुई है। क्या अनपढ़ या कम पढ़ा लिखा होना गर्व की बात है? जिस देश के प्रधानमंत्री को कम पढ़े लिखे होने पर गर्व हो, उस देश में एक आम आदमी के बच्चे के लिए अच्छी शिक्षा का इंतजाम नहीं किया जाएगा। हाल के वर्षों में 60 हजार सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया जाना इस बात का जीता जागता प्रमाण है। ऐसे में मेरा भारत कैसे तरक्की करेगा? उन्होंने लिखा कि आप अपनी छोटी सी कंपनी के लिए एक मैनेजर रखने के लिए भी एक पढ़े लिखे व्यक्ति को ही ढूंढते हैं। क्या देश के सबसे बड़े मैनेजर को पढ़ा लिखा नहीं होना चाहिए?

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