मुंबई: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना UBT को एक और झटका लगा है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे पर पार्टी के रुख से उनकी नाराजगी थी।
आनंद दुबे ने मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वह पिछले कई महीनों से पार्टी की भूमिका को लेकर असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने इस्तीफे के फैसले को भारी मन से उठाया गया कदम बताया।
‘जिस ट्रेन में कॉकरोच हो, उसमें सफर नहीं करूंगा’
पार्टी छोड़ने के बाद आनंद दुबे ने अपने राजनीतिक विचारों और आदर्शों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि शरजील इमाम, उमर खालिद और ध्रुव राठी उनके आदर्श नहीं हैं। उनके मुताबिक, छत्रपति शिवाजी महाराज और वीर सावरकर उनके आदर्श हैं।
उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम के बारे में कहा कि वह फिलहाल किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने का ऐलान नहीं कर रहे हैं। उचित राजनीतिक मंच मिलने पर ही वह आगे का फैसला करेंगे। इसी दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस ट्रेन में कॉकरोच हों, उसमें वह सफर नहीं करना चाहेंगे।
आनंद दुबे ने यह भी कहा कि सरकार की आलोचना करना और महंगाई-बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आंदोलन करना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है, लेकिन देश के हितों के खिलाफ काम नहीं होना चाहिए।
चुनाव आयोग और SIR को लेकर मतभेद
आनंद दुबे के इस्तीफे की प्रमुख वजह चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर शिवसेना UBT के रुख से असहमति बताई जा रही है। उद्धव ठाकरे की पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा है और इस मुद्दे पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ सरकार तथा चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रही है।
दुबे ने अपने बयान में पार्टी की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर असहमति जताई। हालांकि, उनके इस्तीफे के बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी।
आदित्य ठाकरे ने बुलाई थी रैली
इस बीच, शिवसेना UBT नेता आदित्य ठाकरे ने चुनाव आयोग, SIR और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर समर्थन जुटाने के लिए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में रैली का आह्वान किया था। उन्होंने लोगों से लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार के पक्ष में एकजुट होने की अपील की।
आदित्य ठाकरे ने यह भी कहा था कि हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई के बाद उनकी पार्टी लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लोगों के साथ खड़ी रहेगी।
आनंद दुबे का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब शिवसेना UBT चुनाव आयोग और मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के साथ राजनीतिक अभियान चला रही है। उनके अगले कदम और पार्टी की प्रतिक्रिया से महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम का आगे का रुख स्पष्ट हो सकता है।

