Maharashtra Politics: शिवसेना (UBT) में बड़ी टूट! 6 सांसदों ने स्पीकर को लिखा पत्र

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Shiv Sena Split: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लोकसभा सांसदों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है।

सूत्रों के अनुसार, पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। इस कदम को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

अलग राजनीतिक पहचान की मांग

बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने संसदीय स्तर पर अलग समूह के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इन सांसदों का झुकाव मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ओर माना जा रहा है। हालांकि औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

दिल्ली में तेज हुई राजनीतिक गतिविधियां

जानकारी के मुताबिक, बागी रुख अपनाने वाले सांसद बुधवार सुबह अलग-अलग स्थानों से दिल्ली पहुंचे और इसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को अपना पत्र सौंपा। इस घटनाक्रम ने संसद से लेकर महाराष्ट्र तक राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

उद्धव ठाकरे के साथ फिलहाल तीन सांसद

वर्तमान स्थिति में शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद सार्वजनिक रूप से उद्धव ठाकरे के साथ नजर आए। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद मौजूद रहे, जबकि बाकी छह सांसद वहां दिखाई नहीं दिए।

संजय राउत का पलटवार

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि पार्टी के सांसद शिवसेना (UBT) के चुनाव चिन्ह और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ने का फैसला करता है, तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। राउत ने यह भी कहा कि पार्टी ऐसे मामलों को गंभीरता से लेगी और संगठनात्मक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

महाराष्ट्र की राजनीति पर असर

लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि संसदीय स्तर पर अलग समूह को मान्यता मिलती है, तो इसका असर विपक्षी गठबंधन और राज्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और आने वाले दिनों में बागी सांसदों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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