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महाराष्ट्र पॉलिटिक्स : कांग्रेस उम्मीदवार प्रणीति शिंदे के समर्थन में आखिर क्यों उतरे वाम नेता नरसैया एडम ?

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न्यूज़ डेस्क 
कहने को तो बहुत कुछ कहा जा रहा है लेकिन कांग्रेस के पक्ष में अब बहुत कुछ होता दिख रहा है। एक तरफ जहाँ महाराष्ट्र में बीजेपी और उसके समर्थन वाली पार्टी को लग रहा है कि इस बार भी एनडीए की बड़ी जीत होगी वही अब इंडिया गठबंधन के समर्थन में भी कई बड़े नेता खड़े होते दिख रहे हैं। कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणीति शिंदे को सोमवार को उस समय बड़ी ताकत मिली, जब उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और अनुभवी कम्युनिस्ट नेता नरसैया एडम ने उन्हें समर्थन दिया।

प्रणीति का मुकाबला भाजपा उम्मीदवार राम सातपुते से है। इस साल जनवरी में सोलापुर जिले के कुंभारी में 15,000 घरों की टाउनशिप, रे नगर प्रधानमंत्री आवास योजना हाउसिंग कॉलोनी के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करने के बाद एडम ने सुर्खियां बटोरी थीं। एडम ने इस परियोजना की कल्पना की थी और यूपीए शासन के दौरान इसे केंद्र सरकार के समक्ष ले गए और बाद में 2014 से भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान इसका पालन किया।

एडम का निर्णय तब आया, जब प्रणीति ने उनका समर्थन मांगने के लिए उनके कार्यालय में उनसे मुलाकात की।एडम ने लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी और राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन को अपना समर्थन देने की घोषणा की। भाजपा ने 2014 और 2019 के चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को हराकर सोलापुर लोकसभा सीट पर कब्जा किया था।

 एडम ने माकपा के लिए सोलापुर सेंट्रल विधानसभा सीट पर दावा करते हुए कहा है कि वह पहले ही एनसीपी- एसपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और राज्य कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले से बातचीत कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, ”सोलापुर सेंट्रल विधानसभा सीट के लिए फैसला कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से बातचीत के बाद लिया जाएगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने मुझे बताया है कि अगर कांग्रेस आलाकमान आगे बढ़ता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।”

एडम ने 1978, 1995 और 2004 में विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन वह 2009 के चुनाव में प्रणीति से हार गए थे और उसके बाद 2014 और 2019 का चुनाव भी हार गए। 

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