कर्नाटक में बीजेपी और जेडीएस गठबंधन से दोनों दलों के नेता नाखुश ,पार्टी छोड़ने को तैयार !

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अखिलेश अखिल 

कर्नाटक की राजनीति में आगे क्या कुछ होना है यह किसी को पता नहीं। दो दिन पहले अचानक जेडीएस और बीजेपी के बीच आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर गठबंधन  ऐलान हुआ। कुछ लोगों ने कहा कि इससे बीजेपी गठबंधन को लोकसभा चुनाव में लाभ मिल सकता है जबकि कुछ जानकारों ने यहाँ तक कहा कि ये दोनों दल मिलकर कांग्रेस की सरकार को गिराने का खेल कर सकते हैं। हालांकि इस बात की समभावना अभी अभी भी बनी हुई है लेकिन अब कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि बप अभी कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं चला सकती। लोकसभा चुनाव में अगर बीजेपी फिर से सत्ता में लौटेगी तो खेल कर सकती है और ऑपरेशन कमल चला सकती है। 
         बीजेपी आगे क्या कुछ करेगी यह तो भविष्य की बात है लेकिन सतर्क कांग्रेस ने अभी से ही बीजेपी और जेडीएस पर नजरका रखना शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक़ कर्नाटक कांग्रेस ने पार्टी के तीन बड़े नेताओं को यह काम सौप दिया है कि वह बीजेपी जेडीएस के नेताओं की दिनचर्या पर नजर रखे। उनके बयानों को संकलित करे और उनकी बैठकों का आंकलन करे।    
                लेकिन मामल इससे भी आगे बढ़ता दिख रहा है। जब से बीजेपी और जेडीएस के बीच गठबंधन हुआ है तभी से दोनों दलों के बीच घमासान भी मचा हुआ है।  कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि गठबंधन से असंतुष्ट बीजेपी और जेडीएस के नेता कांग्रेस में शामिल होने के लिए आगे आ रहे हैं।     
   शिवकुमार ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस मामले पर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और कैबिनेट मंत्रियों के साथ चर्चा की जा रही है। उन्‍होंने कहा कि हमने जमीनी स्तर पर बीजेपी और जेडीएस के पार्टी कार्यकर्ताओं को शामिल करने के लिए हरी झंडी दे दी है। हम दल-बदल विरोधी कानून को लेकर भी सावधान हैं।
                     दरअसल बीजेपी-जेडीएस में गठबंधन की घोषणा के बाद, बड़ी संख्या में नेताओं, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने जेडीएस छोड़ने का फैसला किया है। जनता दल (एस) के प्रदेश अध्यक्ष सीएम इब्राहिम ने इस घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन मुस्लिम नेता इस संबंध में बैठक कर चुके हैं।जब शिवकुमार से लोकसभा सीटों के लिए मंत्रियों को पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राज्य की सभी 28 लोकसभा सीटों के लिए पर्यवेक्षक पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं। उन्‍होंने कहा कि चूंकि, भारी और मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल विदेश में हैं और बिजली मंत्री के.जे. जॉर्ज अब पार्टी की केंद्रीय समिति में हैं, इसलिए उन्हें पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है।
              डीके शिवकुमार ने बताया कि मुझे 10 दिन में सभी लोकसभा सीटों की रिपोर्ट मिल जाएगी। उम्मीद है कि हर सीट के लिए दो से तीन नाम फाइनल कर लिए जाएंगे। उम्मीदवारों की पहली सूची जनवरी से पहले जारी की जाएगी। 

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