न्यूज़ डेस्क
राजनीति के असली खिलाडी लालू प्रसाद इन दिनों सुर्ख़ियों में हैं। वे बिहार में महागठबंधन के भी सूत्रधार रहे तो विपक्ष एकता के भी नायक के रूप में उभर रहे हैं। विपक्षी एकता का जो रूप सामने आता दिख रहा है उसमे परदे के पीछे से लालू प्रसाद की बड़ी भूमिका है। नीतीश कुमार के साथ मिलकर लालू प्रसाद अब इस तरह की रणनीति पर काम कर रहे हैं कि अगले चुनाव में बीजेपी को कमजोर कर दिया जाए। वे हर रोज बड़ी संख्या में लोगों हैं और लोगों की समस्या का राजनीतिक हल भी निकाल रहे हैं। जो काम सरकार नहीं कर पा रही वह काम लोगों को समझा कर लालू करते दिख रहे हैं। बिहार में उनकी अभी काफी वाहवाही हो रही है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जहां ‘जनता दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम से लोगों की समस्या सुनते हैं, वहीं राजद के मंत्री ‘सुनवाई’ कार्यक्रम के जरिए लोगों की शिकायतें सुन रहे हैं। लेकिन, बिहार शिक्षक संघ का विश्वास राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद पर ज्यादा दिख रहा है। यही कारण है कि शिक्षक संघ अपनी समस्याओं को लेकर लालू प्रसाद के ‘दरबार’ में हाजिर हुए। इन दिनों लालू प्रसाद की स्वस्थ होने के बाद राजनीति में भी सक्रियता बढ़ती दिख रही है। ऐसे में बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने लालू प्रसाद से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है। लोग अब मानते हैं कि लालू प्रसाद चाह लें तो इस सरकार में कोई भी कार्य असंभव नहीं है।
माना जा रहा है कि शिक्षक संघ ने कहीं और नहीं बल्कि लालू प्रसाद के पास हाजिरी लगाई है। संघ ने लालू प्रसाद से निवेदन किया कि यथाशीघ्र पंचायती राज व्यवस्था के तहत नियुक्त शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देते हुए नयी शिक्षक नियुक्ति नियमावली-2023 से आच्छादित करने में अपनी भूमिका अपने स्तर से अदा की जाए।
संघ का दावा है कि इस पर लालू यादव ने यथाशीघ्र शिक्षकों के हित में उचित निर्णय लेने का वचन भी दिया। संघ के लोगों का कहना है कि साथ ही इस मामले पर मुख्यमंत्री से बात कर शिक्षकों की मूलभूत समस्याओं का समाधान यथाशीघ्र करवाने का आश्वासन भी राजद अध्यक्ष ने दिया है। संघ के शिक्षक नेताओं ने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग, बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव केके पाठक द्वारा राज्य सरकार के पूर्व के आदेशों-निर्देशों के प्रतिकूल अपने स्तर से अथवा अपने से नीचे स्तर के पदाधिकारियों द्वारा आदेश निर्गत करवाया जा रहा है।

