लैंड फ़ॉर जॉब मामले में लालू परिवार को मिली जमानत, 29 मार्च को होगी अगली सुनवाई

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न्यूज डेस्क
लैंड फ़ॉर जॉब मामले में आज लालू यादव परिवार को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने 50 हजार के निजी मुचलके पर लालू यादव ,राबड़ी देवी और मीसा भारती को जमानत दे दी है। अब इस मामले की सुनवाई 29 मार्च को होगी। कोर्ट ने 27 फरवरी को लालू यादव परिवार समेत 14 अन्य के खिलाफ समन जारी किया था और कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था। इसके बाद लालू यादव ,राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत तेजस्वी यादव से सीबीआई ने घंटो पूछताछ की थी। लालू यादव पर सीबीआई का आरोप है है कि उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए की लोगो से नौकरी के बदले जमीन ली थी जिसकी कीमत करोड़ों की थी और कम कीमत दिखाकर उसकी रजिस्ट्री करवाई गई थी।

लैंड फ़ॉर जॉब का यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है। पांच महीने पहले सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। सीबीआई का कहना है कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए ग्रुप डी की भर्ती में मनमाने तरीके से नियुक्तियां की थी और नौकरी के बदले जमीन का सौदा किया था। इस खेल में कई अधिकारी भी शामिल थे।

बता दें कि लालू यादव का हाल ही में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। वह अदालत परिसर में ‘व्हील चेयर’ पर नजर आए। लालू सुबह करीब 10 बजे राउज एवेन्यू अदालत पहुंचे। हालांकि, मामले की सुनवाई देर से शुरू हुई। परिवार के तीनों सदस्य पूर्वाह्न करीब 11 बजे न्यायाधीश गीतांजलि गोयल के समक्ष पेश हुए।

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने आरोप पत्र में कहा कि भारतीय रेलवे के निर्धारित मानदंडों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए रेलवे में नियुक्तियां की गईं। इसमें नौकरी के बदले में उम्मीदवारों द्वारा सीधे या अपने करीबी रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के जरिए राजद प्रमुख एवं तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों को बाजार दरों से काफी कम कीमत पर जमीन बेचने का भी आरोप लगाया गया है। न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने 27 फरवरी को प्रसाद की बेटी मीसा भारती समेत सभी आरोपियों को समन जारी किया था और उन्हें 15 मार्च को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था।

सीबीआई का कहना है कि जिन लोगो को नौकरी दी गई उनके डॉक्यूमेंट भी सही नही पाए गए हैं। उनके कई कागजात नकली और फर्जी हैं। रेलवे ने इसी गलत कागजात पर नौकरी दी थी। इस तरह से सीबीआई ने ऐसे सात मामले की जांच करके खुलासा किया कि सात केस ऐसे है जो नौकरी के बदले जमीन की कहानी को आगे बढ़ाते हैं। एक मामला किशुनदेव राय का का है जिन्होंने नौकरी के बदले पटना में राबड़ी देवी के नाम 3375 वर्ग फीट जमीन सिर्फ 3 लाख 75 हजार में राबड़ी देवी के हाथ बेच दी थी। इसी साल किशिनदेव राय के तीन लोगो को नौकरी दी गई।

इसी तरह पटना के हो संजय राय ने भी राबड़ी देवी के हाथ 3375 वर्ग फीट जमीन 3 लाख 75 हजार में बेची और बदले में दो आदमी को मिली। पटना के हो किरण देवी ने मीसा भारती के हाथ 80905 वर्ग फीट जमीन बेची और बदले में किरण देवी के बेटे को नौकरी दी गई। इसी तरह पटना के ही हजारी राय ने 9527 वर्ग फीट जमीन बेची और अपने दो भतीजी को रेलवे में नौकरी दिलाई।

इसी तरह लालबाबू राय और बृजनंदन राय से भी जमीन के बदले नौकरी दी गई। लालबाबु राय ने 1360 वर्ग फीट राबड़ी देवी के हाथ बेची थी जबकि बृजनंदन यादव ने 3375 वर्ग फीट जमीन बेची थी। इन सभी के परिजनों को नौकरी दी गई।

ईडी कहना है कि ये सारे खेल 600 करोड़ के हैं। यह एक बड़ा घोटाला है। जांच से पता चला कि 350 करोड़ का प्लॉट और 250 करोड़ के लेनदेन के तहत यह घोटाला किया गया है।

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