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एनसीपी के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने बड़ा खुलासा किया है। वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी की किताब ‘हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ के विमोचन’ पर उन्होंने बताया कि 1992 में जब राम जन्मभूमि आंदोलन जोर पकड़ रहा था, तब भाजपा नेता विजया राजे सिंधिया ने तब के प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव को बाबरी ढांचे की सुरक्षा का वादा किया था। जिसके बाद उन्होंने अपने मंत्रियों की सलाह के खिलाफ सिंधिया की बात पर विश्वास किया।… और फिर क्या हुआ ये सभी जानते हैं।
किताब के विमोचन के समय शरद पवार ने बताया कि आंदोलन शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के एक समूह के साथ बैठक किया उस बैठक में मैं भी मौजूद था। बैठक में यह फैसला लिया गया कि प्रधानमंत्री को संबंधित पार्टी के नेताओं की बैठक बुलानी चाहिए। उस बैठक में विजया राजे सिंधिया ने प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया था कि बाबरी ढांचे को कुछ नहीं होगा।
इस दौरान पवार ने कहा कि उन्हें, गृह मंत्री और गृह सचिव को लगा कि कुछ भी हो सकता है, लेकिन राव ने सिंधिया पर विश्वास करने का फैसला किया। इस बीच, चौधरी ने घटना के बाद राव की कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया, जिस दौरान प्रधानमंत्री से पूछा गया था कि विध्वंस के समय वह क्या कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि राव ने पत्रकारों से कहा था कि उन्होंने ऐसा होने दिया, क्योंकि इससे एक मुद्दा खत्म हो जाएगा और उन्हें लगा कि भाजपा अपना मुख्य राजनीतिक कार्ड खो देगी।
पुस्तक के विमोचन के दौरान संप्रग सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अन्ना हजारे आंदोलन को ठीक से नहीं संभालना कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के सत्ता से बाहर होने का कारण है। इससे ठीक पहले कई घोटाले सामने आए थे। इस विमोचन के मौके पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, कांग्रेस नेता शशि थरूर, पूर्व रेल मंत्री और भाजपा नेता दिनेश त्रिवेदी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के अलावा शरद पवार मौजूद थे।

