JSSC-CGL विवाद: परीक्षाएं रद्द होने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन, बोले- पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष जारी रहेगा

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JSSC CGL News: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री की ओर से JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना आमरण अनशन स्थगित कर दिया है। वह 2 अगस्त से अनशन पर थे और करीब 16 दिनों तक आंदोलन जारी रखने के बाद उन्होंने इसे फिलहाल रोकने का फैसला लिया।

देवेंद्र नाथ महतो ने सोमवार देर रात कहा कि मुख्यमंत्री के साथ 20 जुलाई को हुई बैठक के बाद 28 जुलाई से मामले की CID जांच शुरू हुई। उनके मुताबिक जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है और मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में शामिल किए गए हैं।

परीक्षाएं रद्द करने के फैसले का किया स्वागत

परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले पर देवेंद्र नाथ महतो ने संतोष जताया। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी और नियुक्ति की दिशा में भी कदम बढ़ चुके थे। ऐसे समय में परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना आसान नहीं था। उनके अनुसार, सरकार ने छात्रों के हित और पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए यह निर्णय लिया है। छात्र नेता ने सरकार के इस कदम को आंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला बताया।

आंदोलन में साथ देने वालों का जताया आभार

अनशन समाप्त करने के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन से जुड़े तमाम लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मंत्री दीपिका पांडेय, विधायक इरफान अंसारी, छात्र साथियों, मीडिया कर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग को याद किया।

उन्होंने उन लोगों का भी विशेष रूप से जिक्र किया जो आंदोलन के दौरान पर्दे के पीछे रहकर मदद कर रहे थे। महतो के मुताबिक, कई ऐसे लोग थे जो देर रात तक आंदोलनकारियों के लिए पानी और खाने-पीने की व्यवस्था करते रहे।

अनशन रुका है, आंदोलन खत्म नहीं हुआ

देवेंद्र नाथ महतो ने साफ किया कि अनशन स्थगित करना उनके संघर्ष का अंत नहीं है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक के लिए उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत बताई, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक या किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। उनका जोर इस बात पर है कि आने वाली पीढ़ी के छात्रों को सरकारी नौकरी की परीक्षा में निष्पक्ष व्यवस्था के लिए आंदोलन या बलिदान करने की जरूरत न पड़े।

परीक्षा व्यवस्था में ऑडिट और निगरानी की मांग

महतो ने भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सख्त व्यवस्था लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि परीक्षा के हर चरण की निगरानी और स्वतंत्र ऑडिट होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक पड़ाव पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट प्रमाण और जवाबदेही की व्यवस्था होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर इस दिशा में विधानसभा से कानून बनाने और व्यापक संवैधानिक बदलाव पर भी विचार किया जाना चाहिए।

JSSC-CGL विवाद क्यों है चर्चा में?

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से छात्रों के बीच चिंता रही है। JSSC-CGL और TDPL परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद अब मामले की जांच और आगे की भर्ती प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

देवेंद्र नाथ महतो के अनशन स्थगित करने से फिलहाल आंदोलन को विराम मिला है, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जांच की दिशा और भविष्य में होने वाली भर्तियों की व्यवस्था को लेकर बहस जारी रहने की संभावना है।

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