Bihar News: बिहार में जल संकट से निपटने के लिए सरकार का जल-जीवन-हरियाली अभियान अब जमीन पर असर दिखाने लगा है। खासकर बेगूसराय जिले में इस अभियान के तहत बड़े पैमाने पर काम हुआ है। पिछले सात वर्षों में यहां 808 सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है, जिससे गांवों में पारंपरिक जल स्रोत फिर से जीवित हो गए हैं।
723 कुओं के पास बने सोक पिट, भूजल बढ़ाने की तैयारी
जल संरक्षण को और मजबूत करने के लिए 723 कुओं के किनारे सोक पिट बनाए गए हैं। ये सोक पिट बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाकर भूगर्भ जलस्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि सिंचाई, पशुपालन और घरेलू जरूरतों के लिए भी पानी की उपलब्धता बेहतर होगी।
पंचायत स्तर पर चल रहा बड़ा अभियान
इस पूरे अभियान को पंचायत स्तर पर लागू किया जा रहा है, जिसमें त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका है। गांवों में कुओं का जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और सोक पिट निर्माण के जरिए जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है।
छत से टैंक तक: बारिश का पानी अब नहीं होगा बर्बाद
जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत वर्षा जल संचयन पर भी खास जोर दिया गया है।
बेगूसराय जिले की ग्राम पंचायतों में 210 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं।
इन संरचनाओं के जरिए छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को पाइप के माध्यम से फिल्टर कर भूमिगत टैंक या सोक पिट में जमा किया जा रहा है। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भविष्य के लिए जल सुरक्षा का मजबूत आधार
अधिकारियों के अनुसार, इन पहलों से भूजल पुनर्भरण में तेजी आई है। इससे खेती, पशुपालन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है। साथ ही आने वाले समय में जल संकट से निपटने के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है।

