ब्लैक होल की स्टडी के लिए एक्सपोसैट सैटेलाइट लॉन्च,इसरो रचेगा नया इतिहास

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बीरेंद्र कुमार झा

नए साल के पहले दिन इसरो एक नया प्रतिमान रचना की तैयारी में है।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को पहले एक्सरे पोलरीमीटर उपग्रह (एक्सपोसैट) को सुबह 9 10 मिनट बजे लॉन्च कर नए साल का स्वागत किया।गौरतालब है कि इस सेटेलाइट की मदद से ब्लैक होल जैसी खगोलीय रचनाओं के रहस्यों से पर्दा उठेगा। बीते वर्ष 2023 के अक्टूबर महीने में गगनयान डी1 मिशन की सफलता के बाद यह प्रक्षेपण किया गया है।इस मिशन का जीवनकाल करीब 5 वर्ष बताया जा रहा है।श्रीहरिकोटा के सतीश धवन केंद्र से इसे लांच किया गया है।

एक्सपोसैट कैसे करेगा काम

एक्सपोसैट का आज का यह प्रक्षेपण ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) सी – 58 रॉकेट का सातवां अभियान है। इस सातवें अभियान पर प्रमुख पेलोड एक्सपोसैट और 10 अन्य उपग्रह भी भेजा जा रहा है,जिन्हें पृथ्वी की निचली ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा।चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर दूर पूर्व में स्थित अंतरिक्ष केंद्र से नए साल के पहले दिन सुबह 9:10 पर इस सेटेलाइट की लांचिंग हुई।

ब्लैक होल के रहस्यों से हटाएगा पर्दा

इसरो सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पीएसएलवी सी – 58 के लिए बीते दिन रविवार को सुबह 8:10 पर उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। गौरतलब है कि एक्सरे पोलरीमीटर सैटेलाइट एक्सपोसैट एक्स-रे स्रोत के रहस्यों का पता लगाने और ब्लैक होल की रहस्यमई दुनिया का अध्ययन करने में मदद करेगा। इसरो सूत्रों के अनुसार यह खगोलीय स्रोतों से एक्सरे उत्सर्जन का अंतरिक्ष आधारित ध्रुवीकरण माप में अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष का पहला समर्पित वैज्ञानिक उपग्रह है।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अन्वेषण में अहम भूमिका निभाएगा एक्सपोसैट मिशन

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के अलावा अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दिसंबर 2021 में सुपरनोवा विस्फोट के अवशेषों और ब्लैक होल से निकलने वाली कणों की धाराओं और अन्य खगोलीय घटनाओं का ऐसा ही अध्ययन किया था। इसरो ने कहा कि एक्सरे ध्रुवीकरण का अंतरिक्ष आधारित अध्ययन अंतरराष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण हो रहा है और इस संदर्भ में एक्सपोसैट मिशन एक हम भूमिका निभाएगा।

 

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