पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए अब एक बेहद खतरनाक और नया पैंतरा आजमाया है।सेना के जवानों और अफसरों के बाद अब भारतीय राजनेताओं, वीआईपी (VIPs) और उच्च अधिकारियों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही है।पश्चिम बंगाल के चर्चित ‘रेनेसां कांड’ की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक सनसनीखेज खुलासे के साथ इस पूरे इंटरनेशनल जासूसी नेटवर्क की धज्जियां उड़ा दी हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने झारखंड में छापेमारी कर अर्पिता सरकार नाम की महिला को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद एसटीएफ की टीम उसे देर रात बर्धमान पुलिस स्टेशन लेकर पहुंची। कड़ाई से की गई पूछताछ में अर्पिता ने जो राज उगले, उसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए।अर्पिता को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हस्तियों, नौकरशाहों और उनके करीबियों को अपने हुस्न के जाल में फंसाकर गोपनीय सूचनाएं निकालने का टास्क दिया गया था। अर्पिता पर न सिर्फ संवेदनशील जानकारी लीक करने, बल्कि कई प्रमुख नेताओं को हनीट्रैप में फंसाकर उनके अपहरण की साजिश रचने का भी गंभीर आरोप है।
जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट की कमान मुख्य आरोपी हमीम मंडल के हाथों में थी, जिसे सीधे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और कुख्यात भट्टी गैंग से निर्देश मिल रहे थे।हमीम को भारत के वीआईपी इलाकों की रेकी करने, सेना व प्रशासन से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां सीमा पार भेजने और इस धंधे में नए लोगों को भर्ती करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
एसटीएफ सूत्रों की मानें तो अर्पिता सरकार और हमीम मंडल का यह नेटवर्क केवल बंगाल या झारखंड तक सीमित नहीं है। इसके तार उत्तर प्रदेश और बिहार के भी कई संदिग्धों से सीधे जुड़े हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब उन तमाम नेताओं और अधिकारियों की सूची तैयार कर रही हैं, जो इस गिरोह के संपर्क में थे या जिन्हें निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही थी।फिलहाल पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं और आने वाले दिनों में कई बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

