न्यूज़ डेस्क
महाराष्ट्र एनसीपी में संग्राम छिड़ा हुआ है। यह संग्राम अब आगे तक चलता रहेगा। असली खेल तभी पता चलेगा जब पार्टी के सांसदों और विधायकों की संख्या किसी एक गुट के पास होगी। कितने विधायक अजित पवार के साथ जाते हैं और कितने संसद शरद पवार का साथ देते हैं यही देखना बाकी है। बाकी जो होना था सब हो गया है। शरद पवार अपनी पार्टी बचाने की हर कोशिश कर रहे हैं तो अजीत पवार भी अब सारे लोक लाज को त्यागकर लोभ के जाल में फंसते चले जा रहे हैं। फिर प्रदेश की जनता उनको नेता मानेगी या फिर शरद पवार भी यह भी देखना होगा।
उधर ,आज एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सांसद प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को पार्टी से निकाल दिया है। उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए कार्रवाई की गई है। एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने पार्टी प्रमुख शरद पवार को लिखे पत्र में इसकी सिफारिश की थी।
इससे पहले एनसीपी अनुशासन समिति ने पार्टी नौ विधायकों को अयोग्य घोषित करने का प्रस्ताव पास कर दिया था। ये वही विधायक हैं, जिन्होंने अजित पवार के साथ बीते दिन शपथ ग्रहण की थी। वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में अपने भतीजे अजीत पवार के शपथ समारोह में शामिल होने के लिए पार्टी के तीन नेताओं को हटा दिया गया है।
एनसीपी) की कार्रवाई को उन लोगों के लिए एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने बागी अजित पवार का समर्थन किया था। निष्कासित नेताओं में मुंबई मंडल राकांपा प्रमुख नरेंद्र राठौड़, अकोला शहर जिला प्रमुख विजय देशमुख और राज्य मंत्री शिवाजीराव गर्जे शामिल हैं। ये तीनों अजित पवार के शपथ समारोह में शामिल हुए थे।
इस बीच शरद पवार ने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल को उन विधायकों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने का अधिकार है, जिन्होंने कल महाराष्ट्र कैबिनेट में शपथ ली थी। उन्होंने कहा, ‘वहां (अजित पवार खेमा) के कई लोगों ने मुझे फोन किया और कहा कि उनकी विचारधारा राकांपा से अलग नहीं है और वे अगले कुछ दिनों में अंतिम निर्णय लेंगे।’ पवार ने यह भी कहा, मेरे पास विधायकों के पार्टी छोड़ने के पुराने अनुभव हैं… भविष्य में अच्छे परिणाम आएंगे।
उधर ,महाराष्ट्र में जारी उठापटक के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर अधिकार की लड़ाई तेज हो गई है। एक तरफ शरद पवार ने अजित के साथियों पर कार्रवाई करनी शुरू की ताे दूसरी तरफ अजित ने पुराने पुरोधाओं को पद से हटा दिया। इसकी शुरुआत तब हुई, जब शरद पवार ने सांसद प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को पार्टी से निकाल दिया। इसके चंद मिनटों के बाद ही अजित गुट ने जयंत पाटिल को राकांपा प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया और सनील तटकरे को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया।
दरअसल, शरद पवार की कार्रवाई के बाद अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल ने सोमवार को एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने एलान किया कि सुनील तटकरे पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे। वे जयंत पाटिल की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे। पाटिल को पद से हटाए जाने की जानकारी दे दी गई है। विधानसभा स्पीकर को भी इस बारे में सूचित कर दिया गया है। प्रफुल्ल पटेल ने यह भी एलान किया कि अनिल भाईदास पाटिल महाराष्ट्र विधानसभा में राकांपा के मुख्य सचेतक बने रहेंगे।
एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अजित पवार को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया है। हमने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को अपने फैसले के बारे में सूचित कर दिया है। हम शरद पवार साहब से हाथ जोड़कर अनुरोध करते हैं कि वह हमें अपना आशीर्वाद दें, क्योंकि वह हमारे गुरु हैं।उन्होंने कहा कि मैंने कार्यकारी अध्यक्ष होने के नाते अपना काम कर रहा हूं। अब तटकरे ही राज्य में पार्टी संगठन में नियुक्ति और अन्य जिम्मेदारी निभाएंगे। इसके अलावा हमने पार्टी के लिए जो भी जरूरी था, वह बदलाव कर दिए हैं। इसकी जानकारी हमने विधानसभा के स्पीकर को भी दे दी है। अयोग्यता को लेकर पूछे गए सवाल के बारे में उन्होंने कहा कि अयोग्य ठहराने का काम पार्टी या कोई और नहीं कर सकता। यह अधिकार विधानसभा स्पीकर के पास है। इसी के साथ प्रफुल्ल पटेल ने एक बार फिर दोहराया कि वे और उनकी पार्टी शिंदे सरकार के साथ है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अजित पवार ने कहा कि एनसीपी के ज्यादातर विधायक हमारे साथ हैं, इसलिए मैं डिप्टी सीएम बना। जब उनसे यह पूछा गया एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन है? इस पर अजित पवार ने कहा कि शरद पवार ही एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इस प्रफुल्ल पटेल ने भी कहा कि आज गुरु पूर्णिमा है, हम सभी चाहते हैं कि शरद पवार हमें आशीर्वाद देते रहें।

