न्यूज़ डेस्क
यह गजब का मामला है। एक तरफ फ़्रांस के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी का शानदार स्वागत किया जा रहा है और उन्हें वहां के सबसे उच्च सम्मान से पुरस्कृत भी किया गया है लेकिन इसी दौरान यूरोपीय संघ की संसद ने मणिपुर के मामले पर एक प्रस्ताव भी मंजूर किया है। इस प्रस्ताव में मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून यानी अफस्पा को हटाने और इंटरनेट बहाल करने की मांग की गई है । साथ ही यूरोपीय संघ की संसद ने भाजपा सांसदों की ओर से दिए जाने वाले राष्ट्रवादी भाषणों को खारिज किया। दूसरी ओर भारत सरकार ने मणिपुर को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए यूरोपीय संघ की संसद के प्रस्ताव को खारिज किया है।
जिस प्रस्ताव को यूरोपीय संघ की संसद में स्वीकार किया गया, उसमें कहा गया है कि, मणिपुर ने पहले अलगाववादी विद्रोह का सामना किया है, जिसमें गंभीर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया था, जबकि, हिंसा के नवीनतम दौर में मानवाधिकार समूहों ने मणिपुर और राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार पर विभाजनकारी जातीय राष्ट्रवादी नीतियों को लागू करने का आरोप लगाया है, जो विशेष धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करती हैं।
यूरोपीय संघ की संसद में मणिपुर के मसले पर चर्चा के बीच भारत सरकार ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने कहा- हमने यूरोपीय संघ के सांसदों तक पहुंचने के प्रयास किए। यह मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। गौरतलब है कि 11 जुलाई को यूरोपीय संघ ने मानवाधिकारों, लोकतंत्र और कानून के शासन के उल्लंघन के मामलों पर बहस के एजेंडे में शामिल करने के लिए एक प्रस्ताव जारी किया।
