बीरेंद्र कुमार झा
इसराइल और हमास के युद्ध के बीच भारत ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की तैयारियां तेज कर दी है। खबर है कि भारत भी अब आयरन डोम स्थापित करने की योजना बना रहा है। संभावना बताई जा रही है देश के कई अहम स्थानों पर 2028 – 29 तक देसी आयरन डोम तैनात हो जाएगा, जो लड़ाकू विमान ड्रोन और मिसाइल जैसे हमलों से देश की रक्षा करेगा। हालांकि इसे लेकर आधिकारिक तौर पर सेना या रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी कुछ भी नहीं कहा गया है।
इजराइल के पास है आयरन डोम
युद्ध के बीच इजराइल का आयरन डोम काफी चर्चा में है।दरअसल यह एक बैटरी की सीरीज है जो रडार के इस्तेमाल से शॉर्ट रेंज रॉकेट का पता लगाती है और उन्हें खत्म कर देती है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अमेरिकी डिफेंस कंपनी ने बताया कि हर बैटरी में तीन या चार लांचर ,20 मिसाइल और एक रडार शामिल होता है।
कैसे करता है काम
जैसे ही रडार रॉकेट का पता लगता है तो सिस्टम जानकारी जुटाता है कि रॉकेट किसी आबादी वाले इलाके की ओर जा रहा है या नहीं। अगर यह आबादी वाले क्षेत्र की ओर जा रहा होता है , तो सिस्टम मिसाइल लांच करता है और रॉकेट को बीच में ही तबाह कर देता है।
350 किलोमीटर तक करेगा मार
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि ‘ प्रोजेक्ट कुशा ‘ के तहत डीआरडीओ ने लॉन्ग रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (LRSAM) को तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि लॉन्ग रेंज सर्विस लॉन्च और फायर कंट्रोल रडार्स वाले मोबाइल एलआरएसएएम में अलग-अलग तरह की इंटरसेप्टर मिसाइल भी होगी जो 150 किलोमीटर 250 किलोमीटर और 250 किलोमीटर की रेंज तक दुश्मन को हवा में निशाना बना सकती हैं।
80- 90 % होगी दक्षता
रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया कि इस सिस्टम में दुश्मन को मार गिराए जाने की संभावना 80% तक होगी। वहीं अगर लगातार फायर किया गया तो यह संभावना बढ़कर 90% तक पहुंच जाएगी।डीआरडीओ सूत्रों का कहना है कि एलआरएसएएम सिस्टम लो रडार क्रॉस सेक्शन वाले हाई स्पीड टारगेट्स के खिलाफ ज्यादा असरदार होगा। यह कई संवेदनशील इलाकों को हवाई सुरक्षा देगा।
रूसी सिस्टम से तुलना
भारतीय वायु सेवा में हाल ही में रूस के एस – 400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम को शामिल किया गया है। अब कहा जा रहा है कि भारत के देसी आयरन डोम की तुलना भी इससे की जा सकेगी।वायु सेना को उम्मीद है कि एस – 400 के बचे हुए दो और स्क्वाड्रोंस रूस – यूक्रेन युद्ध के चलते हुए देरी के बाद अब अगले 1 साल में सेना में शामिल हो पाएंगे। इस समझौते में शामिल शुरुआती दो स्क्वाड्रोंस को उत्तर पश्चिमी और पूर्व भारत में चीन और पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए तैनात किया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार एलआर- एसएएम भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड और कंट्रोल सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा।

