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पश्चिम बंगाल में भी जेसीबी से लोगों के घर उजाड़ने की तैयारी,स्थानीय लोगों का भारी विरोध

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बीरेंद्र कुमार
हमारे देश में विभिन्न स्थानों पर पहले लोगों को अवैध रूप से आशियाना बसाने दिया जाता है,और फिर बाद में उनके आशियाने को उजाड़ने के लिए बुलडोजर भेज दिए जाते हैं। उत्तर प्रदेश के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिनों तक बुलडोजर से ऐसी अवैध बस्ती को ढहाने से रोक दिया गया है लेकिन अब पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर वारिया और माया बाजार सहित कई इलाकों में बसी ऐसी अवैध बस्तियों में लोगों के आशियाने को ढाहने के लिए बुलडोजर भेजे जा रहे हैं। हालांकि अतिक्रमण हटाने गए रेल अधिकारियों और रेलवे पुलिस को वहां लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा और उन्हें बुलडोजर समेत वापस वहां से बैरंग लौट जाना पड़ा।

बीजेपी विधायक के खिलाफ लगे गो बैक के नारे

हंगामे की खबर पाकर दुर्गापुर पश्चिम के बीजेपी विधायक लखन घुरुई मौके पर पहुंचे तो वहां उन्हें बस्ती के लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा। उनके खिलाफ लोगों ने गो बैक के नारे लगाए गए। टीएमसी नेता दिनेश यादव ने बीजेपी विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि रेल केंद्र सरकार के अधीन है। केंद्र में बैठी मोदी सरकार एक ओर आवास योजना देकर लोगों को राहत देने का ढोंग करती है तो, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार के नुमाइंदे बस्ती उजाड़ने यहां पहुंच गए हैं। पूर्व पार्षद लोकनाथ दास ने बताया कि इससे पहले भी तृणमूल कांग्रेस की ओर से पुनर्वासन की मांग को लेकर रेल प्रशासन को आवेदन दिया गया था,लेकिन कुछ हुआ नहीं।

बीजेपी विधायक ने राज्य सरकार को घेरा

घटनास्थल पर लोगों के पक्ष में पहुंचने पर लोगों के विरोध को लेकर बीजेपी विधायक लखन घुरुई ने कहा कि विरोध करने वाले लोग स्थानीय नहीं है, बल्कि ये तृणमूल कांग्रेस के गुंडे और दलाल हैं। ये यहां अतिक्रमण के नाम पर अपनी राजनीति कर रहे हैं। बस्ती के लोगों को पुनर्वासन के लिए बीजेपी सांसद एसएस आहलूवालिया और खुद मैने केंद्र सरकार को कई बार आवेदन दिया है। बस्ती के लोगों की पुनर्वास की मांग सही है और केंद्र सरकार इस पर विचार कर रही है। उनका कहना है कि इस बस्ती के लोगों के नए आशियाना को बसाने के लिए राज्य सरकार को जमीन मुहैया करानी चाहिए। पुनर्वासन के तौर पर केंद्र सरकार अतिक्रमण से प्रभावित हुए हर नागरिक को आवास बनाने का जिम्मा लेती है। लेकिन स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के दलाल प्रवृत्ति के लोग रेल के अभियान को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। रेलवे के विकास कार्य को इस प्रकार से रोकना उचित नहीं।
अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी रहेगा

लोगों के विरोध को देखते हुए फिलहाल तो रेल प्रशासन ने अपने अतिक्रमण हटाने के कार्य को स्थगित कर दिया है। लेकिन वह आगे अपने इस अभियान को जारी रखेगी। इस बारे में आसनसोल रेल डिवीजन के जनसंपर्क विभाग के अधिकारी एस मंडल ने कहा कि लोगों का विरोध करना उचित नहीं है। कॉरिडोर निर्माण के लिए बस्ती हटाना जरूरी है। रेलवे प्रशासन का अतिक्रमण अभियान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत किया जा रहा है। इस तरीके के आंदोलन से रेल प्रशासन का अभियान बंद नहीं किया जा सकता है। जल्दी अतिक्रमण हटाओ अभियान दोबारा शुरू किया जाएगा।

हजारों लोगों को आशियाना छिनेने का सता रहा डर

गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व ही दुर्गापुर एवं वारियां स्टेशन के बीच हजारों की संख्या में रेल की जमीन पर बनी बस्ती को हटाने का रेल प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया जा चुका है। इससे लोगों में दहशत है। बस्ती के लोगों को अपना घर छिन जाने का भय सताने लगा है। सूत्रों के मुताबिक दुर्गापुर के विपरीत वर्ण स्टैंड के कपड़ा बाजार पट्टी, देशबंधु नगर, वारिया, माया बाजार,विजयनगर, कोल डिपो, और पाद पुकूर सहित कई बस्तियों में हजारों की संख्या में हिंदी भाषी लोग रहते हैं जो गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करते हैं। इनका कहना है कि पहले उनका पुनर्वास कर दिया जाए फिर बस्ती को हटाया जाए।

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