रामलला प्राण प्रतिष्ठा के बीच बड़ा ऐलान,अयोध्या में बनने वाली मस्जिद की आई तारीख

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सुप्रीम कोर्ट द्वार अयोध्या के विवादित बाबरी मस्जिद प्रकरण को संपत्ति विवाद मानते हुए जो फैसला दिया था ,उसमें रामलला की हिस्से में और सीता रसोई के हिस्से में आई जमीन पर तो मंदिर बनना इस फैसला के आने के बाद एक ट्रस्ट बनाकर शुरू कर दिया गयाऔर आज 22 जनवरी को राम मंदिर में भगवाल रामलला की प्राण प्रतिष्ठा भी पीएम के द्वारा मुख्य यजमान के रूप में कर दी गई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से इस विवादित जमीन के मस्जिद के हिस्से में जो जमीन आई ,जिसे बाद में सद्भावना के दृष्टिकोण से अयोध्या में ही दूसरी जगह दी गई,वहां मस्जिद निर्माण का कार्य अभी तक शुरू नहीं हुए।असदुद्दीन ओवैसी जैसे कुछ मुस्लिम नेताओं ने तो ऐसे विवादास्पद रूप से खैरात में मिली जमीन पर मस्जिद नहीं बनाने जैसे विचार प्रकट किए।लेकिन अब इस रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के बीच अयोध्या में बनने वाली मस्जिद को लेकर भी एक बड़ी जानकारी सामने आई है। राइटर की रिपोर्ट के मुताबिक इंडो इस्लामिक कल्चरल फाऊंडेशन इस साल से अयोध्या में मिली इस जमीन पर भव्य मस्जिद निर्माण शुरू कर देगा। रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इसे पूरा होने में 3 से 4 साल का समय लग सकता है।इस मस्जिद प्रोजेक्ट की देखरेख इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन की डेवलपमेंट कमेटी कर रही है,जिसके प्रमुख हाजी अराफात शेख हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद के लिए धन जुटाने को लेकर क्राउड फंडिंग वेबसाइट लांच करने की तैयारी चल रही है।

नई मस्जिद का नाम मस्जिद मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह होगा

अयोध्या में बनने वाली इस नई मस्जिद का नाम अब बाबरी मस्जिद नहीं होगा, बल्कि इस मस्जिद का नाम अब पैगंबर मोहम्मद के नाम पर मस्जिद मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह रखा जाएगा।अराफात शेख ने बताया कि हमारा प्रयास लोगों के बीच के दुश्मनी और नफरत को खत्म करना रहा है। हम लोगों में एक दूसरे के प्रति प्रेम भरना चाहते हैं, चाहे आप सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करें या ना करें ।उन्होंने कहा कि अगर हम अपने बच्चों और लोगों को अच्छी बातें सिखाएंगे तो यह लड़ाई अपने आप खत्म हो जाएगी। यही कारण है की इस मस्जिद का नाम अब बाबरी मस्जिद नहीं रखने का विचार किया गया है।

हमने फंड के लिए किसी से संपर्क नहीं किया:आईआईसीएफ

इंडो- इस्लामिक कल्चरल फाऊंडेशन के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी ने कहा कि हमारी संस्था ने फंड के लिए किसी से भी संपर्क नहीं किया है। फारूकी ने कहा कि हमने अब तक किसी से भी  फंड के लिए संपर्क नहीं साधा है और न ही फंड के लिए कोई सार्वजनिक आंदोलन ही चलाया है। आईआईसीएफ के सचिव अजहर हुसैन ने कहा कि यह बात सही है कि मस्जिद के निर्माण में देरी हुई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हम इसकी डिजाइन में और अधिक पारंपरिक तत्वों को जोड़ना चाहते थे। खास बात यह भी है कि मस्जिद के परिसर में 500 बेड वाला अस्पताल भी बनाया जाएगा।

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