Bihar News: बिहार की सड़कों से होगी बड़ी कमाई, 3,000 KM हाईवे और 40 पुलों पर सरकार का मास्टर प्लान

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पटना: बिहार सरकार राज्य के सड़क बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई देने और निजी निवेश आकर्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। पथ निर्माण विभाग ने सड़क परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण (Asset Monetization) को लेकर देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों और निवेशकों के साथ अहम परिचर्चा आयोजित की। इस पहल का उद्देश्य सड़क परियोजनाओं में निजी भागीदारी बढ़ाना, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और राज्य की आर्थिक विकास गति को तेज करना है।

बैठक में राजकीय राजमार्गों, प्रमुख सड़कों और बड़े पुलों के मुद्रीकरण, टोल नीति, राजस्व मॉडल और निजी निवेशकों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बिहार के 3,000 किलोमीटर हाईवे और 40 से अधिक पुल होंगे शामिल

पथ निर्माण विभाग ने सड़क परिसंपत्ति मुद्रीकरण के पहले चरण में लगभग 3,000 किलोमीटर राजकीय राजमार्गों और 40 से अधिक बड़े पुलों की पहचान की है। इन परियोजनाओं को ‘टोल ऑपरेट एंड ट्रांसफर (TOT)’ मॉडल के तहत विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

विभाग के अनुसार, इन परिसंपत्तियों से संभावित राजस्व का आकलन किया जा रहा है और इसके लिए विस्तृत ट्रैफिक एवं वित्तीय अध्ययन जारी है। इसके बाद निवेशकों को परियोजनाओं में भागीदारी का अवसर दिया जाएगा।

दूसरे चरण में 600 KM निर्माणाधीन हाईवे भी होंगे शामिल

सरकार की योजना केवल मौजूदा सड़क नेटवर्क तक सीमित नहीं है। अगले चरण में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) और ईपीसी (EPC) मॉडल के तहत बन रहे करीब 600 किलोमीटर नए राजमार्गों को भी एसेट मोनेटाइजेशन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे और विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

बिहार बना परफॉर्मेंस-बेस्ड रोड मेंटेनेंस सिस्टम का अग्रणी राज्य

परिचर्चा को संबोधित करते हुए पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि बिहार सड़क रखरखाव के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।

उन्होंने बताया कि राज्य में परफॉर्मेंस-बेस्ड मेंटेनेंस सिस्टम (Performance-Based Maintenance System) लागू किया गया है और वर्तमान में लगभग 19,305 किलोमीटर सड़क नेटवर्क का रखरखाव OPRMC मॉडल के तहत किया जा रहा है।

सबसे बड़ी बात यह है कि अब सड़कों की निगरानी और रखरखाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीकों को भी शामिल किया जा रहा है, जिससे सड़क प्रबंधन और अधिक प्रभावी हो सकेगा।

बिहार में तेजी से बढ़ रहा वाहन स्वामित्व

बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए सचिव ने बताया कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और लोगों की बढ़ती आय के कारण राज्य में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

पिछले सात वर्षों में वाहन पंजीकरण की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 6 प्रतिशत रही है। वहीं वर्ष 2011 से 2024 के बीच परिवहन एवं संचार क्षेत्र में बिहार ने 7.6 प्रतिशत विकास दर दर्ज की है, जो देश में शीर्ष राज्यों में शामिल है।

निवेशकों ने दिए कई अहम सुझाव

बैठक में देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और TOT मॉडल, ट्रैफिक सर्वे, टोल राजस्व, निवेश सुरक्षा, राजस्व घाटे और नई मुद्रीकरण पद्धतियों को लेकर अपने सुझाव दिए।

पथ निर्माण विभाग ने निवेशकों के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के सफल मॉडलों का अध्ययन किया गया है और राज्य की नई नीति में व्यवहारिक सुझावों को शामिल किया जाएगा।

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