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लोकसभा चुनाव से पूर्व झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर से खेला आदिवासी कार्ड, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मांगी मदद

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बीरेंद्र कुमार झा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तीन दिवसीय झारखंड दौरा के दूसरे दिन खूंटी में आयोजित महिला स्वयं सहायता समूह के सम्मेलन को संबोधित करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासियों को स्वावलंबी बनाने के लिए, उनकी आय के स्रोतों को बढ़ाने पर केंद्र और राज्य की सरकार मिलकर चिंतन मंथन करते हैं, लेकिन उस मंथन के परिणाम को बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। आज आदिवासी समुदाय कई चुनौतियों से संघर्ष कर रहा है।

राष्ट्रपति से के द्वारा सरना धर्म कोड दिलाने की की मांग

हेमंत सोरेन ने कहा कि जल जंगल और जमीन की हमारी पहचान अब कोयला, तांबा, अभ्रक और यूरेनियम से बदल गई है। हमारी खनिज संपदा से पूरा देश रोशन हो रहा है ,लेकिन आदिवासी समुदाय के लोग आज भी विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। वह दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए भी जद्दोजहद कर रहे हैं। हेमंत सोरेन ने कहा कि आज आदिवासी समुदाय की महिला देश के सर्वोच्च पद पर बैठी हैं, वह झारखंड में राज्यपाल के रूप में भी रही हैं। वह आदिवासी समुदाय के लिए जीवन मरण की मांगों को केंद्र से स्वीकृति दिलाने में मदद करें। हेमंत सोरेन ने उनसे केंद्र द्वारा सरना धर्म कोड दिलाने की मांग की भी मांग की। इसके साथ ही उन्होंने मुंडारी व कुरुख भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने में भी राष्ट्रपति से मदद करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा की राज्य के आदिवासियों को आगे लाने में केंद्र से मदद की काफी उम्मीद है।पिछले 20 वर्षों में राज्य का जितना विकास होना चाहिए, उतना नहीं हुआ है। जनजातीय कार्य मंत्री भी हमारे राज्य से ही है। झारखंड के प्रति उनका भी लगाव दिखाना चाहिए। राज्य के आदिवासियों को मौका दिलाने में उन्हें मदद करनी चाहिए।

वनोपज संग्रह कराने वाली महिलाओं को उपलब्ध कराया जाएगा बाजार मूल्य

महिला स्वयं सहायता समूह को संबोधित करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री  ने कहा कि राज्य में सिद्धू कान्हो कृषि फेडरेशन का गठन कर तेजी से काम हो रहा है। इसे गति देने के लिए सभी पंचायत समितियों को राशि उपलब्ध कराई गई है। राज्य में चलने वाले सेल्फ हेल्प ग्रुप से लगभग 22 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। इन माध्यमों से उनको आर्थिक सहायता देकर उपज का सही मूल्य दिलाने का काम किया जा रहा है।

हेमंत सोरेन  ने कहा कि राज्य में मार्केटिंग करने के लिए पलाश ब्रांड बनाया गया है। पलाश ग्राउंड की मांग बाजार में इतनी अच्छी है कि उत्पादन कम पड़ गया है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में 14000 से अधिक गांववनोपज से सीधे जुड़े हैं। राज्य मे लाह, तसर, चिरौंजी जैसे कई वनोपज हैं, लेकिन ग्रामीण किसानों को वनोपज का लाभ नहीं मिलता है विचौलिया उनसे सस्ता खरीद कर महंगा बेचता है। सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी चिंता की बात है।

उन्होंने कहा कि लाह का एमएसपी 240 से ₹280 है, जबकि बाजार में यह 11 सौ से 12 सौ रुपए तक है। इसी तरह 22 से ₹24 एमएसपी वाले करंज का बाजार भाव ₹40 है। ग्रामीणों से ₹200 किलो सहित खरीद कर ₹500 तक में बेचा जाता है।राज्य सरकार ने तय किया है कि फेडरेशन के माध्यम से वनोपज संग्रह करने वाली महिलाओं से उत्पाद एकत्र कर उनको बाजार मूल्य उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अर्जुन मुंडा जब से जनजाति कार्य मंत्री बने हैं, तब से ट्राइफेड में थोड़ी सक्रियता दिखी है।उम्मीद है कि उनके मंत्री होने का लाभ इस राज्य को मिलेगा।

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