- वीरेंद्र कुमार झा
मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव तथा पूर्व गृह सचिव राजीव अरुण एक्का के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता को जांच की जवाबदेही दी गई है। इस बाबत कार्मिक विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। विभागीय आदेश में लिखा गया है कि पिछले दिनों एक वीडियो क्लिप
जांच आयोग अधिनियम 1952 की धारा – 3 के तहत गठित हुआ आयोग
सामने आया था, जिसमें राजीव अरुण एक्का, आईएएस को कथित रूप से एक निजी मकान में अधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए दिखाया गया है।
उपरोक्त वर्णित वीडियो क्लिप ने महत्वपूर्ण पदों पर आसीन एक लोक सेवक द्वारा आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोपों को जन्म दिया है।इस मामले की लेकर कार्मिक विभाग द्वारा लिखा गया है कि राज्य सरकार इस मुद्दे को सार्वजनिक महत्व का मानती है। इसके लिए संपूर्ण स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। इस कारण सरकार जांच आयोग अधिनियम 1952 की धारा 3 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करना उचित समझती है।
झारखंड सरकार ने जांच आयोग अधिनियम 1952 की धारा 3 के तहत शक्तियों का प्रदर्शन करते हुए, झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता (सेवानिवृत्त )को इस मामले से संबंधित मुद्दों और आरोपों के बारे में जांच करने के उद्देश्य से एक सदस्यीय जांच आयोग के रूप में नियुक्त किया है।
जांच आयोग इस अधिसूचना के जारी होने की तारीख से 6 महीने के अंदर अपनी जांच पूरी करेगा। राज्य सरकार ने जांच आयोग से, सरकार को अन्य बातों के साथ अपने निष्कर्षों और सिफारिशों वाली एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया है। इस आदेश को सक्षम प्राधिकार से अनुमति के बाद कार्मिक विभाग के अवर सचिव विनोद ने जारी किया है।
क्या है मामला
पिछले दिनों बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने एक वीडियो क्लिप जारी कर यह आरोप लगाया था कि राजीव अरुण एक्का महत्वपूर्ण फाइलों को विशाल चौधरी के अरगोड़ा स्थित कार्यालय में उनकी अनुमति से निबटाते थे। उन्होंने इसमें बड़ा खेल होने का आरोप लगाया था। इस वीडियो क्लिप में राजीव अरुण एक्का किसी कागज पर दस्तखत करते हुए नजर आ रहे थे और उनके सामने एक महिला भी खड़ी थी।
इस वीडियो में कथित रूप से विशाल चौधरी के साथ होने की बात कही गई है साथ ही वीडियो क्लिप में पैसे के लेन-देन का आरोप लगाया गया है ।हालांकि राजीव अरुण एक्का ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि विशाल चौधरी उनके मित्र हैं। वे विशाल चौधरी के बिजनेस में सहयोग के लिए, कागजात कैसे तैयार किया जाता है, यह लिख कर बता रहे थे ।उन्होंने पैसे के लेन-देन की बात को निराधार बताया था।गौरतलब है कि विशाल चौधरी की जांच चल रही है। इस विडियो क्लिप के सामने आते ही सरकार ने राजीव अरुण एक्का को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के पद से हटा दिया था।
