बीरेंद्र कुमार झा
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रवर्तन निदेशालय (ED) को चुनौती देंगे। उनकी ओर से झारखंड हाईकोर्ट में संभवत शनिवार को क्रिमिनल रिट याचिका दायर की जाएगी।जानकारी के अनुसार शुक्रवार को याचिका की प्रति मामले की प्रतिवादी केंद्र सरकार ईडी को रिसीव करा दिया गया है ।जस्टिस केपी देव के आकस्मिक निधन के कारण शुक्रवार को हाईकोर्ट बंद रहा, जिसके चलते याचिका दायर नहीं हो पाई।याचिका में ईडी द्वारा जारी समन को चुनौती दी गई है। प्रार्थी ने मामले में राहत देने का आग्रह किया है।अब 23 सितंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ईडी के सामने पेश होंगे या नहीं इसे लेकर संशय बरकरार है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था। ईडी ने चौथी बार समन जारी कर हेमंत सोरेन को 23 सितंबर को पूछताछ के लिए बुलाया है। इसके पूर्व ईडी की तरफ से 14 अगस्त,24 अगस्त और 9 सितंबर को पूछताछ के लिए श्री हेमंत सोरेन को बुलाया जा चुका है। ईडी ने उन्हें चौथी बार समन भेजकर 23 सितंबर को रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में दिन के 11:00 बजे हाजिर होने के लिए कहा है। सदर थाने में बड़गाई के राजस्व कर्मचारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आलोक में ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पहला समन जारी कर 14 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था,लेकिन मुख्यमंत्री ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक करार देते हुए समन वापस नहीं करने पर कानूनी व्यवस्था अपनाने को लेकर पत्र लिखा ।
24 अगस्त को भेजा दूसरा समन
ईडी ने दूसरा समन जारी कर 24 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए बुलाया।लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दूसरे समान से से पहले ही सुप्रीम कोर्ट में ईडी के समन को चुनौती दी थी। मुख्यमंत्री की ओर से 24 अगस्त को ईडी को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की सूचना दी।साथ ही उनके द्वारा ईडी से कोर्ट के फैसले तक इंतजार करने का अनुरोध किया गया। लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से जल्दी सुनवाई का अनुरोध नहीं किए जाने की वजह से ईडी ने तीसरा समन भेज कर मुख्यमंत्री को 9 सितंबर को पूछताछ के लिए बुलाया।
23 सितंबर को चौथा समन
इसके बाद ईडी ने उन्हें चौथा समन भेजा।इस बीच मुख्यमंत्री की ओर से दायर याचिका पर 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस और न्यायाधीश बेला त्रिवेदी की पीठ में सुनवाई हुई।सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री को किसी तरह की राहत देने के बदले उनकी याचिका रद्द कर दी और हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की आजादी दी।

