अखिलेश अखिल
पूर्वोत्तर राज्य जल रहा है। सरकारी दावे तो बहुत से हैं लेकिन सच बड़ा ही कठोर है। सरकारी आंकड़े कह रहे हैं कि करीब सवा सौ लोगों की जाने गई है लेकिन गैर सरकारी दावे भयावह हैं। गैरसरकारी आंकड़ों की बात माने तो करीब ढाई से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हजार से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। लेकिन मामला इतना भर का ही नहीं है। इस हिंसा में बड़ी संख्या में चर्च भी जलाये गए हैं। खबर के मुताबिक 253 चर्च जल कर ख़ाक हो चुके हैं और करीब 56 हजार से ज्यादा लोग विषपान के शिकार होकर शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। विस्थापन का दर्द क्या होता है इसका अनुभव उसकी को हो सकता है जिन्होंने कभी विस्थापन को जिया है। सरकार कह रही है कि शान्ति लाने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं कि शांति कही दिख नहीं रही। हर गली ,चौराहे पर सन्नाटा है। रात ढलते ही बवाल होता है। एक दूसरे पर हमले होते हैं और लोग मारे जाते हैं या फिर अंग भंग हो जाते हैं। इस छोटे से राज्य में जितने आधुनिक हथियार और गोले बारिद का इस्तेमाल किया जा रहा है यह भी बड़ा सवाल है कि ये सब आते कहाँ से हैं ? और फिर इसकी आपूर्ति कौन करता है ?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चुराचांदपुर जिले में मान्यता प्राप्त जनजातियों के संगठन आईटीएलएफ ने चर्चों पर हुए हमलों को लेकर जानकारी दी है। इस संगठन की तरफ से राज्यपाल अनुसुईया उइके को एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें चर्चों को लेकर ये दावा किया गया है की जानबूझ कर दुसरे समुदाय के लोगों ने चर्च को निशाना बनाया। बता दें कि मणिपुर का चुराचंदपुर जिला हिंसा में सबसे अधिक प्रभावित हुआ था।
मणिपुर में 3 मई से हिंसा शुरु हुई थी, जो अब तक जारी है। सरकार के सारे उपाय यहां नाकाम दिख रहे हैं। राज्य के सबसे ज्यादा आबादी वाले मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति के दर्जे की मांग के बाद कुकी और नगा समुदाय ने इसका विरोध शुरू किया। इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान ये हिंसा भड़कनी शुरू हुई।
आईटीएलएफ ने मणिपुर की राज्यपाल को जो ज्ञापन सौंपा है, उसमें साफ़-साफ ये आरोप लगाया गया है कि मेतई और सरकार की विचारधारा एक सामान है जिसके चलते कुकी समुदाय के लोगों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी अनदेखी हो रही है। इस संगठन ने आरोप लगाया कि उनके लोगों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से हिंसा की जा रही है। आगे यह भी दावा किया है कि इस हिंसा में कई लोग लापता हैं और 160 गांवों के लगभग 4500 घरों को जला दिया गया है। जिसके चलते यहां के सिर्फ एक समुदाय के करीब 36 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं।
3 मई से शुरू हुए हिंसक झड़प में अभी तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 105 लोगों की मौत हो चुकी है। 320 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालांकि यह सरकारी आंकड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार वास्तविक संख्या कई गुना अधिक है। मणिपुर में जारी हिंसा को देखते हुए राज्य में इंटरनेट पर पाबंदी 15 जून तक बढ़ा दी गई है। सूचना एवं जनसंपर्क और स्वास्थ्य मंत्री एस. रंजन ने यहां कहा कि मणिपुर की जातीय हिंसा में विस्थापित हुए 55 ,650 से अधिक पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को 350 शिविरों में शरण दी गई है।
मोरेह-इम्फाल, इम्फाल-चुराचंदपुर और इम्फाल-कांगपोकपी से हेलीकाप्टर सेवाएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं। विभिन्न कुकी आदिवासी संगठनों ने मणिपुर में इम्फाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करना जारी रखा है, जिससे आवश्यक वस्तुओं, खाद्यान्नों, परिवहन ईंधन और जीवन रक्षक दवाओं के परिवहन की गंभीर समस्या पैदा हो गई है।
दरअसल मणिपुर का मेइती समुदाय उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग कर रहा है। इसके खिलाफ तीन मई को राज्य के पर्वतीय जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया, जिसके बाद राज्य में हिंसा शुरू हो गई। राज्य के 16 जिलों में से 11 में कर्फ्यू लगा हुआ है।

