न्यूज डेस्क
ज्ञानवापी मामले पर वाराणसी हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। वाराणसी हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाएं खारिज कर दी। हाई कोर्ट में हुए सुनवाई पर वकील विजय शंकर रस्तोगी ने बयान दिया है कि, “मुस्लिम पक्ष की तरफ से जो याचिकाएं दाखिल की गई थी उन्हें खारिज कर दिया गया। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को 6 महीने के अंदर मामले में अंतिम फैसला सुनाने को कहा है। वजूखाने का सर्वे भी होगा। अदालत के समक्ष दायर मुकदमे में तर्क दिया गया है कि मस्जिद मंदिर का हिस्सा है।
जज जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने मालिकाना हक विवाद के मुकदमों को चुनौती देने वाली सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिकाएं खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मुकदमा देश के दो प्रमुख समुदायों को प्रभावित करता है।
सोमवार को एएसआई ने ज्ञानवापी के साइंटिफिक सर्वे की रिपोर्ट जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में जमा कराई थी। इसके बाद अगली सुनवाई 21 दिसंबर को किए जाने की घोषणा की गई। वहीं, मंगलवार को अब हर किसी की नजर इलाहाबाद हाई कोर्ट पर टिकी हुई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट में ज्ञानवापी से जुड़ी पांच याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी।
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने 8 दिसंबर को पांचों मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था। मंगलवार की सुबह जस्टिस अग्रवाल ने इन पांचों केस में फैसला सुनाया। उन्होंने मुस्लिम पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर पांच याचिकाओं में से तीन वाराणसी कोर्ट में 1991 में दायर किए गए केस की पोषणीयता से जुड़ी हुई थी। वहीं, दो अन्य याचिका एएसआई सर्वेक्षण के खिलाफ दायर की गई थी। अब इन पांचों याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।
गौरतलब है कि वाराणसी में जिला अदालत 32 साल पहले वर्ष 1991 में दाखिल किए गए सिविल वाद के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया कमेटी वाराणसी तथा सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने याचिकाएं दायर की थीं। कुल पांच याचिकाएं इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित थीं। दो याचिकाओं में 1991 में वाराणसी की जिला अदालत में दायर मूल वाद की पोषणीयता को चुनौती दी गई थी तो तीन याचिकाओं में अदालत के परिसर के सर्वे आदेश को चुनौती दी गई थी।

